ashtavakra Gita

जब मन की सारी दौड़ समाप्त हो जाती है । Quietude – शांति Chapter 10

यह अष्टाव के गीता अध्याय 10 ( उपसम प्रकरण ) का प्रारंभ है । इस अध्याय का मुख्य संदेश है – मन को संसार की दौड़ से हटकर आत्मा में…

अष्टावक्र गीता अध्याय 9 – वासना, द्वन्द्व और वैराग्य का रहस्य | Detachment

अष्टावक्र गीता का नया अध्याय साधक को जीवन के सबसे गहरी भ्रमों से बाहर निकलने का प्रयास करता है । इस अध्याय में अष्टावक्र जनक को बताते हैं कि संसार…

जिसने स्वयं को जान लिया, उसके शब्द क्यों खो जाते हैं? | अष्टावक्र गीता का मौन रहस्य

खुद को जानने के बाद इंसान बोलना क्यों छोड़ देता है? हम पूरी जिंदगी बोलते रहते हैं। अपने बारे में, दूसरों के बारे में, अपने दुख, अपनी इच्छाएं, अपने विचार।…

अध्याय 8 – बन्धन और मोक्ष का रहस्य (The Secret of Bondage and Liberation)

अष्टावक्र गीता का आठवां अध्याय अत्यंत सक्षिप्त हैं परंतु इसके चार श्लोक संपूर्ण आध्यात्मिक जीवन का सर समेटे हुए हैं । यहां अष्टावक्र बंधन और मोक्ष की ऐसी परिभाषा देते…

अध्याय 7 – आत्मज्ञान की पराकाष्ठा (Nature of Self-Realization)

अष्टावक्र गीता के सातवें अध्याय में राजा जनक अपने आत्मानुभव को व्यक्त कर रहे हैं। अब वे केवल शास्त्रों की बातें नहीं कर रहे, बल्कि उस सत्य को बोल रहे…

Chapter – 6 – The Higher Knowledge | लययोग ( उच्चतम आत्मज्ञान)

इस अध्याय में वक्ता बदल जाते हैं । अब ऋषि अष्टावक्र नहीं बल्कि आत्मा ज्ञान प्राप्त कर चुके राजा जनक अपने अनुभव को व्यक्त कर रहे हैं पिछले अध्ययनों में…

Chapter 5 – four ways to dissolution | आत्मा में विलीन होने का मार्ग

पांचवी अध्याय में ऋषि अष्टावक्र राजा जनक को आत्मज्ञान की अंतिम अवस्था का रहस्य बताते हैं इस अध्याय का मुख्य विषय है लय अर्थात मन अहंकार और देहाभिमान का आत्मा…

Chapter 4 Glorification of self realization | आत्म ज्ञान कि महिमा

अष्टावक्र गीता का चौथा अध्याय glorification of self realization आत्मज्ञान की महिमा आत्म ज्ञान व्यक्ति की अद्भुत अवस्था का वर्णन करता है यहां राजा जनक आश्चर्यचकित होकर बताते हैं कि…

अध्याय 3 – आत्म बोध का स्वाद | taste of self realization

अष्टावक्र गीता का तीसरा अध्याय आत्मज्ञान के बाद मनुष्य के वास्तविक अवस्था का वर्णन करता है यह अध्याय केवल दर्शन ही बल्कि उसे व्यक्ति की मन: स्थिति को प्रकट करता…

अध्याय 2 — आत्मसाक्षात्कार में शिष्य का आनंद | ashtavakra Gita explain details

यह अध्याय केवल शास्त्र का ज्ञान नहीं है, बल्कि उस आत्मा की पुकार है जिसने स्वयं को पहचान लिया। पहले अध्याय में गुरु Ashtavakra ने राजा Janaka को आत्मज्ञान का…

आत्मज्ञान का उपदेश Ashtavakragita chapter 1

यह अध्याय केवल श्लोकों का संग्रह नहीं है, बल्कि मनुष्य को उसके वास्तविक स्वरूप का प्रत्यक्ष बोध कराने वाला दिव्य संवाद है। Ashtavakra यहाँ आत्मा का ऐसा ज्ञान देते हैं…

मैं महासमुंद हु , संसार केवल लहर है | लय योग क्या है, लय योग का रहस्य| अष्टावक्र गीता अध्याय 7

अष्टावक्र गीता का सातवां प्रकरण राजा जनक की आत्म साक्षात्कार से उपजी वाणी है यहां गुरु नहीं बोल रहे यहां ज्ञान स्वयं बोल रहा है । आत्मा= अन्नत महासमुंद संसार=…

” मैं ” ही बंधन है| बंधन और मोक्ष को समझो | अष्टावक्र गीता अध्याय 8 explain

यह अध्याय न साधना सीखता है , ना नियम , न तपस्या , यह केवल बताता है कि बंधन कब है और मोक्ष कब है ? “जिस काल में चित…

सच में गुरु कौन है ? आत्म ज्ञान का रहस्य अष्टावक्र गीता  | Ashtavakra gita explain

Ashtavakra Gita chapter 9 slok 6 details explain * “क्या गुरु आपको मुक्त कर सकता है?* क्या कोई और आपकी मुक्ति की गारंटी ले सकता है?* या मुक्ति एकदम व्यक्तिगत,…

वासना ही संसार है  , वासना ही दुख का कारण है |  अष्टावक्र गीता अध्याय 9 श्लोक 8 explain| life lessons from ashtavakra Gita

वासना ही संसार है इसलिए सब वासनाओं को छोड़ दें वासना का त्याग ही संसार का त्याग है अब तू जहां चाहे , जैसे चाहे , स्थित हो जा ||…