रण संग्राम भायाँ रे बिना सुणो,धरती सूनी भये पांडु रे बिना । भजन लिरिक्स
रण संग्राम भायाँ रे बिना सुणो, धरती सूनी भये पांडु रे बिना । धरणी रो तेज सूरज बिना सुणो, रण सुणी एकचंद रे बिना, रण संग्राम भायाँ रे बिना सुणो,…
रण संग्राम भायाँ रे बिना सुणो, धरती सूनी भये पांडु रे बिना । धरणी रो तेज सूरज बिना सुणो, रण सुणी एकचंद रे बिना, रण संग्राम भायाँ रे बिना सुणो,…
भजे व्रजैकमण्डनं समस्तपापखण्डनं स्वभक्तचित्तरंजनं सदैव नन्दनन्दनम ् । सुपिच्छगुच्छमस्तकं सुनादवेणुहस्तकं अनंगरंगसागरं नमामि कृष्णनागरम् ॥१॥ मनोजगर्वमोचनं विशाललोललोचनं विधूतगोपशोचनं नमामि पद्मलोचनम ् । करारविन्दभूधरं स्मितावलोकसुन्दरं महेन्द्रमानदारणं नमामि कृष्णावारणम् ॥२॥ कदम्बसूनकुण्डलं सुचारुगण्डमण्डलं व्रजांगनैकवल्लभं…
जब दुःख का साथा छाये, सीताराम गाइये जब कष्ट भी समझ ना आए, सीताराम गाइये सीताराम गाइये, सीताराम गाइये सीताराम गाइये, सीताराम गाइये सीताराम ॐ।। जब मन भारी हो जाये,…
करमा में लिखयोडो मिले बाटो राम थारी नगरी में काई धाटो । कोई ने मिले भाई लाडू और पेड़ा। कोई ने मिले बाजरी आटो। राम थारी नगरी में काई धाटो…
एक डाल दो पंछी बैठा , कौन गुरु कौन चेला, गुरु की करनी गुरु भरेगा, चेला की करनी चेला रे साधु भाई, उड़ जा हंस अकेला।। माटी चुन चुन महल…
दोहा:- धिन धिन धोरा धरती ने, पड़ियो समंद में सीप । कलयुग में पर्चा दिया, जय हो रामा पीर ।। रंग लागो रे, माने कोड़ लागो, माने जाणो रुणीचे वाले…
हलों दीवाना यूं कई बैठा, आगे तो मौज मजा की है , साचा गुरु रा साचा चेला, झूठो ने माया खा गई हैं हो जी । सतगुरु दाता सैन बताई,…
संत हमारे सिरधणी, मैं संतन की देह । राम रोम में रम रया, प्रभु ज्यूं बादल में मेह ॥ एकण वार आईजों, सतगुरु बारम्बार आईजों धिनगुरुसा म्हारे देश में ओ…
अरे साँवरा गेरी करुला मनवार, म्हारे घर आवो रे । ए आवो आवो म्हारा नन्द जी रा लाल गाया राक म्वाल, म्हारे घर आवो रे ॥ अरे साँवरा गेरी करूला…
🔥 कभी-कभी पीछे मुड़कर देखने पर समझ आता है कि हमारी जिंदगी में सबसे बड़ी समस्या परिस्थितियाँ नहीं थीं, बल्कि हमारी आदतें थीं। हम जानते थे कि हमें क्या करना…
🔥 ब्रह्मचर्य केवल शरीर पर नियंत्रण का नाम नहीं है, बल्कि अपने मन, समय, दृष्टि और ऊर्जा पर नियंत्रण रखना भी है। और इस नियंत्रण की शुरुआत सुबह आँख खुलते…
” ब्रह्मचर्य में मौन केवल चुप रहना नहीं, बल्कि ऊर्जा को भीतर स्थिर करना है। अनावश्यक बोलना मानसिक शक्ति को बिखेर देता है। जब व्यक्ति सीमित और सार्थक शब्दों में…
पन्द्रहवें प्रकरण में अष्टावक्र मुनि जनक को बार-बार उसी सत्य की ओर ले जाते हैं, लेकिन इस बार बात केवल किसी साधना, कर्म, पूजा या बाहरी परिवर्तन की नहीं है।…
जिस वातावरण में आप रहते हैं, और जिन लोगों से आप घिरे होते हैं, वे आपके ब्रह्मचर्य की शक्ति को या तो बढ़ा सकते हैं या पूरी तरह नष्ट कर…
🔥 “मन पर विजय — स्वयं पर विजय” आज सितंबर 2026 से तुम्हारा September Brahmacharya Challenge शुरू हो रहा है। यह सिर्फ 30 दिनों तक कुछ नियम निभाने का लक्ष्य…
मृदुल भाषिणी राधा ! राधा !! सौंदर्य राषिणी राधा ! राधा !!परम् पुनीता राधा ! राधा !! नित्य नवनीता राधा ! राधा !! रास विलासिनी राधा ! राधा !! दिव्य…
जब ज़िद पे आ गई पार्वती पार्वतीं, पार्वती समझान े पहुँच े सप्तऋष ि सप्तऋषि, सप्तऋष ि काय जिद कर रही काय को मर रही काय जिद कर रही काय…