ऐसी कृपा करो श्री राधे – राधा कृष्ण भजन| aisi kripa Karo shree radhe -mind relax song
श्री राधे मेरी स्वामिनी, मैं राधे जू को दास,जनम जनम के दीजिये मोहि, श्री वृंदावन को वास ऐसी कृपा करो श्री राधे, दीजो वृंदावन को वासवृंदावन को वास दीजो, हरि…
श्री राधे मेरी स्वामिनी, मैं राधे जू को दास,जनम जनम के दीजिये मोहि, श्री वृंदावन को वास ऐसी कृपा करो श्री राधे, दीजो वृंदावन को वासवृंदावन को वास दीजो, हरि…
पूर्णिमा के अनंत चंद्र मंडलों को लज्जित करने वाली जो उनसे भी अधिक शोभित हैं ।जिनकी कृपा कटाक्ष अनंत लोको को पवित्र करने वाली है वह शुभ दृष्टि वाले कृपामय…
आज कोई बड़ा परिवर्तन करने का दिन नहीं है आज केवल एक बात समझने का दिन है कि “मन तुम्हारा मालिक नहीं है वह केवल एक उपकरण है” अक्सर हम…
अष्टावक्र गीता का नया अध्याय साधक को जीवन के सबसे गहरी भ्रमों से बाहर निकलने का प्रयास करता है । इस अध्याय में अष्टावक्र जनक को बताते हैं कि संसार…
खुद को जानने के बाद इंसान बोलना क्यों छोड़ देता है? हम पूरी जिंदगी बोलते रहते हैं। अपने बारे में, दूसरों के बारे में, अपने दुख, अपनी इच्छाएं, अपने विचार।…
आज का चैलेंज है कि पूरा दिन बिना शिकायत किया बिताना । सुनने में यह बहुत आसान लगता है लेकिन वास्तव में यह मन को जीतने की एक बड़ी साधना…
“आज काम से कम 10 पेज किसी अच्छी पुस्तक के पढ़ो और एक महत्वपूर्ण सिख अपनी डायरी मेंलिखो “ आज का चैलेंज है प्रतिदिन कम से कम 10 पेज पढ़ना…
कभी ध्यान दिया है कि हम अपना अधिकांश जीवन उन चीजों को बदलने की कोशिश में बिताते हैं जो हमारे नियंत्रण में ही नहीं है ? हम चाहते हैं कि…
अष्टावक्र गीता का आठवां अध्याय अत्यंत सक्षिप्त हैं परंतु इसके चार श्लोक संपूर्ण आध्यात्मिक जीवन का सर समेटे हुए हैं । यहां अष्टावक्र बंधन और मोक्ष की ऐसी परिभाषा देते…
वेदांत और योग के अनुसार मनुष्य केवल शरीर नहीं है। हमारे भीतर कई स्तर काम करते हैं—मन, चित्त, अहंकार, बुद्धि, इंद्रियाँ, प्रवृत्ति और निवृत्ति। इन सबको समझ लेना आत्मज्ञान की…
दर्शण देता जाइजो जी, सतगुरु मिळता जाइजो जी । म्हारे पीवरिया री बातां थोड़ी म्हने, केहता जाइजो जी । सोने जेड़ी पीली पड़ गई, दुनियाँ बतावे रोग । रोग दोग…
अष्टावक्र गीता के सातवें अध्याय में राजा जनक अपने आत्मानुभव को व्यक्त कर रहे हैं। अब वे केवल शास्त्रों की बातें नहीं कर रहे, बल्कि उस सत्य को बोल रहे…
इस अध्याय में वक्ता बदल जाते हैं । अब ऋषि अष्टावक्र नहीं बल्कि आत्मा ज्ञान प्राप्त कर चुके राजा जनक अपने अनुभव को व्यक्त कर रहे हैं पिछले अध्ययनों में…
राम गयो वनवास, म्हारो लखन गयो वनवास, चंदा छुप जा रे, चंदा छुप जा रे, चंदा छुप जा रे बादल में, म्हारो राम गयो वनवास ।। राम बिना मारी सुनी…
राम राम श्री राम राम श्री राम राम श्री राम राम राम श्री राम राम श्री राम राम श्री राम राम राम श्री राम श्री राम राम राम श्री राम…
जय श्री हनुमान जय श्री हनुमान जय श्री हनुमान मंगल मूर्ति नन्दन सकल अमंगल मूल पवन संकलारी । हृदय विराज बिहारी जय जय जय बंजरंग बलि जय जय जय बंजरंग…
पांचवी अध्याय में ऋषि अष्टावक्र राजा जनक को आत्मज्ञान की अंतिम अवस्था का रहस्य बताते हैं इस अध्याय का मुख्य विषय है लय अर्थात मन अहंकार और देहाभिमान का आत्मा…