Day 4 – अपनी इंद्रियों और मन को जीतना सीखो
हर महान ऋषि, संत, योद्धा और सफल व्यक्ति की नींव एक ही रही है — मन और इंद्रियों पर विजय। जिसने अपने मन को जीत लिया, उसने संसार को जीत…
हर महान ऋषि, संत, योद्धा और सफल व्यक्ति की नींव एक ही रही है — मन और इंद्रियों पर विजय। जिसने अपने मन को जीत लिया, उसने संसार को जीत…
6 Month Challenge के तीसरे दिन का नियम है — प्रतिदिन कम से कम 60 मिनट अपने शरीर के लिए निकालो। चाहे योग हो, दौड़ हो, सूर्य नमस्कार हो, जिम…
View this post on Instagram जय मनभावन, जय अतिपावन, शोक नशावन शिवशंभो विपद विदारन, अधम उबारन, सत्य सनातन शिवशंभो सहज वचनहर, जलज नयनवर, धवल-वरन-तन शिवशंभो, मदन-कदन-कर पाप-हरण-हर, चरण मनन, धन…
View this post on Instagram जय रामेश्वर, जय नागेश्वर वैद्यनाथ, केदार हरे, मल्लिकार्जुन, सोमनाथ, जय, महाकाल ओंकार हरे, त्र्यम्बकेश्वर, जय घुश्मेश्वर भीमेश्वर जगतार हरे, काशी-पति, श्री विश्वनाथ जय मंगलमय अघहार…
यदि तुम अपने जीवन में केवल एक परिवर्तन कर सको, तो वह अपनी सुबह को बदलने का होना चाहिए। दुनिया के अधिकांश सफल, अनुशासित और प्रभावशाली लोगों में एक समान…
” जीवन में एक नियम का पालन अवश्य होना चाहिए: समय पर उठना और समय पर सोना‘” किसी भी महान परिवर्तन की शुरुआत किसी बड़े कार्य से नहीं होती, बल्कि…
।। श्री जगन्नाथ वंदना ।। जगन्नाथ, जगन्नाथ, चक्का नैन, चक्का नैन, नीलांचल वारे, तू ना संभाले तो हमें कौन संभाले, मेरी ये नैया है अब तो तेरे हवाले, तू ना…
गुरु बिन घोर अंधेरा रे सन्तों, गुरु बिन घोर अंधेरा जी बिना दीपक मन्दिरियो सूनो, अब नहीं वस्तु का बेरा हो जी ॥ * जब तक कन्या रेवे कंबारी, नहीं…
थारा देवल में बाजा रे बाजे, दिवला री जोत जगाई ऐ माँ, आव आव मारी ईडाणा माँ, अति कटे देर लगाई है माँ रमता रे रमता रमता रमता हे रमता…
दोहा : जमले माँहि जावणो, जागे रावळमाल । रूपां गुरु से अरज करे, गुरु म्हारे सामी भाळ । थाई वायक आया गुरु देव रा ए रूपों बाई जमले पधारो रे…
प्रातः काल से सायं काल तक की हर व्यक्ति की अपनी एक दिनचर्या होनी चाहिए। ऐसा नहीं कि आज हम 4:00 बजे उठे, कल 7:00 बजे उठे, फिर मन को…
डॉक्टर स्वप्नील पाटिल जी जलगांव महाराष्ट्र से राधे राधे महाराज जी आपके चरणों मेंकोटि-कोटि प्रणाम । महाराज जी क्या ग्रस्त नाम जापक जो होता है सांसारिक प्रलोभनों से हमेशा बचना…
छह महीने की चुनौती — अब जीवन को बदलना है अब बहुत हो चुका। बीता हुआ समय वापस नहीं आएगा, लेकिन आने वाले छह महीने पूरी जिंदगी की दिशा बदल…
अष्टावक्र गीता का तीसरा अध्याय आत्मज्ञान के बाद मनुष्य के वास्तविक अवस्था का वर्णन करता है यह अध्याय केवल दर्शन ही बल्कि उसे व्यक्ति की मन: स्थिति को प्रकट करता…
म्हारो संदेशों म्हारा , गुरुजी ने दीजो रे , सेवक ने चरणा में लिजो रे म्हारो संदेशों म्हारा , गुरुजी ने दीजो रे , काया रो देवल , म्हाने लागे…
श्री राम की गली में तुम जाना वहाँ नाचते मिलेंगे हनुमाना उनके तन में है राम, उनके मन में है राम अपनी आँखों से देखे वो कण-कण में राम श्री…
यह अध्याय केवल शास्त्र का ज्ञान नहीं है, बल्कि उस आत्मा की पुकार है जिसने स्वयं को पहचान लिया। पहले अध्याय में गुरु Ashtavakra ने राजा Janaka को आत्मज्ञान का…