FOCUS= SUCCESS
” जहां अवधान (ध्यान) होता है , वही सिद्धि जन्म लेती हैं .।”
कल्पना कीजिए कि सुबह का समय है सूर्य की पहली किरणें धरती को छू रही है एक ही समय पर दो युवक अपने जीवन की शुरुआत कर रहे हैं पहले युवक के हाथ में मोबाइल है उसकी आंखें हर 5 मिनट में नई सूचना नया वीडियो नया मनोरंजन खोज रही वह सोचता है कि उसके पास बहुत समय है दूसरी और दूसरा युवक अपने कमरे का दरवाजा बंद करता है मेज पर केवल एक पुस्तक रखता है और मन ही मन संकल्प लेता है अगले तीन घंटे मेरा पूरा जीवन केवल इसी कार्य के लिए हैं वर्षों बाद पहले युवक लोगों से कहता है कि मेरी किस्मत अच्छी नहीं थी जबकि दूसरे युवक सफलता की ऊंचाई पर खड़ा होता है दोनों के बीच अंतर बुद्धि का नहीं था भाग्य का नहीं था बल्कि केवल अवधान का था
संस्कृत का यह महान वाक्य ” अवधानात जायते सिद्धी “केवल एक श्लोक नहीं बल्कि संपूर्ण जीवन का नियम है इसका अर्थ है सफलता ध्यान से जन्म देती है संसार में जितनी भी महान खोज हुई जितनी भी अद्भुत कलाकृतियां बनी जितने भी महान साम्राज्य खड़े हुए वे किसी जादू से नहीं वे बने एक ऐसे मन से जो एक समय में केवल एक लक्ष्य पर स्थित रह सका जब मन इधर-उधर भटकता है तब शक्ति बिखर जाती है लेकिन जब वही एक मन बिंदु पर टिक जाता है तो साधारण मनुष्य भी और असाधारण बन जाता है
प्रकृति स्वयं हमें यह यह रहस्य सिखाती है सूर्य की किरणें प्रतिदिन पृथ्वी पर गिरती है लेकिन वे सामान्य रूप से केवल प्रकाश देती है वही किरणें यदि एक छोटे से लेंस के माध्यम से एक बिंदु पर केंद्रित कर दी जाए तो कागज तक जल उठता है सोचिए यदि निर्जीव प्रकाश में इतनी शक्ति है तो चेतन मन में कितनी होगी मनुष्य की बुद्धि भी सूर्य के प्रकाश की तरह है यदि वह हर दिशा में दौड़ती रहे तो केवल थकान मिलेगी यदि वह एक दिशा में टिक जाए तो असंभव भी संभव हो जाता है
आज का आधुनिक युग हमें यह नहीं सिखाता की कैसे ध्यान लगाए बल्कि यह सिखाता है कि हर क्षण ध्यान कैसे भटकाए सुबह उड़ने ही मोबाइल सोशल मीडिया फिर नोटिफिकेशन फिर ईमेल फिर शॉर्ट वीडियो फिर अनावश्यक चर्चाएं मन एक क्षण भी शांत नहीं रहता आज सबसे बड़ा युद्ध किसी देश की सीमाओं पर नहीं बल्कि मनुष्य के ध्यान पर लड़ा जा रहा है कंपनियां आपका समय नहीं खरीदती वह आपका ध्यान खरीदती है क्योंकि उन्हें पता है कि जिस व्यक्ति का ध्यान उसके पास है उसका भविष्य भी धीरे-धीरे उसके नियंत्रण में आ जाएगा
एक प्राचीन गुरू ने अपने शिष्य से पूछा जब तुम तीर चलाते हो तब तुम्हें क्या दिखाई देता है शिष्य बोला पेड़ हवा पक्षी और लक्ष्य गुरु ने कहा इसलिए तुम चूक जाते हो वर्षों के अभ्यास के बाद गुरु ने वही प्रश्न दोहराया इस बार शिष्य बोला मुझे केवल लक्ष्य दिखाई देता है गुरु मुस्कुराए और बोले अब सिद्धी तुम्हारे सामने झुकेगी यही अवधान है जहाँ मन केवल उसी वस्तु को देखता है जो वास्तव में आवश्यक है
जीवन का हर क्षेत्र इसी नियम पर चलता है विद्यार्थी यदि पढ़ते समय केवल पढ़ाई में डूब जाए तो साधारण बुद्धि वाला भी उत्कृष्ट परिणाम ला सकता है व्यापारी यदि हर दिन एक महत्वपूर्ण कार्य पूरी निष्ठा से करें तो उसका व्यापार वर्षों तक बढ़ता रहेगा कलाकार यदि अपनी कला में खो जाए तो उसकी रचना समय की सीमाओं को पार कर सकती है साधक यदि ईश्वर के स्मरण में स्थिर हो जाए तो उसे आत्मानुभूती का मार्ग मिल जाता है सफलता का क्षेत्र चाहे कोई भी हो नियम एक ही है अवधानात जायते सिद्धी:
अक्सर लोग कहते हैं मेरे पास प्रतिभा नहीं है लेकिन इतिहास बताता है की प्रतिभा से अधिक शक्तिशाली निरंतर ध्यान है और साधारण लोग जन्म से ही अलग नहीं होते वह केवल अपने ध्यान की रक्षा करना सीख जाते हैं वह जानते हैं कि हर हां के साथ अनेक अनावश्यक चीजों को ना कहना पड़ता है इसलिए वे वह अपने समय ऊर्जा और मन को व्यर्थ ही बातों में खर्च नहीं करते
याद रखिए सफलता कभी अचानक नहीं आती वह हर दिन किए गए छोटे-छोटे केंद्रित प्रयासों का परिणाम होती है जैसे एक-एक ईट जोड़कर महल बनता है वैसे ही एक-एक केंद्रित घंटे से महान जीवन बनता है दुनिया परिणाम देखती है लेकिन परिणाम के पीछे छिपे हजारों घंटे के मोन अभ्यास को नहीं देखती वही मोन अभ्यास सिद्धि का वास्तविक बीज़ है
इस अध्याय का सार केवल इतना है आपका भविष्य आपकी बुद्धि से कम और आपके अवधान से अधिक निर्धारित होता है जिस दिन आपने अपने ध्यान पर अधिकार पा लिया उसी दिन सफलता की यात्रा आरंभ हो गई क्योंकि संसार का सबसे बड़ा धन पैसा नहीं प्रतिभा नहीं अवसर नहीं बल्कि एकाग्र अवधान है और जहाँ अवधान है वहॉं प्रगति है जहां प्रगति है वहॉं सिद्धी है और जहाँ सिद्धी है वहीं एक सार्थक प्रभावशाली और असाधारण जीवन जन्म लेता है
