फोकस क्यों आवश्यक है? 1000× गुना लाभ कैसे लें? The power of focus CHAPTER 1
इस पुस्तक का उद्देश्य आपको केवल जानकारी देना नहीं है, बल्कि आपके जीवन का परिवर्तन करना है। ज्ञान तभी मूल्यवान है, जब वह आपके व्यवहार, निर्णय और परिणामों में दिखाई…
इस पुस्तक का उद्देश्य आपको केवल जानकारी देना नहीं है, बल्कि आपके जीवन का परिवर्तन करना है। ज्ञान तभी मूल्यवान है, जब वह आपके व्यवहार, निर्णय और परिणामों में दिखाई…
“जहां ध्यान जाता है , वही जीवन बदलता है” कल्पना कीजिए कि आपके पास दुनिया की सबसे शक्तिशाली मशीन है , लेकिन उसे चलाने के लिए केवल एक ही ईंधन…
ओ पालनहारे निर्गुण और न्यारे तुमरे बिन हमरा कौनों नाही हमरी उलझन , सुलझाओ भगवान तुमरे बिन हमरा कौनों नाही तुम्ही हमका हो संभाले तुम्हीं हमारे रखवाले तुमरे बिन हमरा…
सब सुख सागररूप उजागररहे वृंदावनधामसब सुख सागर रूपउजागररहे वृंदावनधामरूप गोस्वामीप्रकट कियोजहां रूप गोस्वामीप्रकट कियो जहां गोविंद रूपनिधानवृंदावनप्यारो वृंदावनश्री वृंदावनमेरो वृंदावनश्री वृंदावनप्यारो वृंदावनश्री वृंदावनमेरो वृंदावन बिहरत निश दिन कुंज गलिन में…
यह अष्टाव के गीता अध्याय 10 ( उपसम प्रकरण ) का प्रारंभ है । इस अध्याय का मुख्य संदेश है – मन को संसार की दौड़ से हटकर आत्मा में…
दोस्तों जरा अपने ही जीवन की एक सच्चाई याद कीजिए , कितनी बार ऐसा हुआ कि जिस दिन आपके पास कोई काम नहीं था उसे दिन आपका मन सबसे ज्यादा…
पूर्णिमा के अनंत चंद्र मंडलों को लज्जित करने वाली जो उनसे भी अधिक शोभित हैं ।जिनकी कृपा कटाक्ष अनंत लोको को पवित्र करने वाली है वह शुभ दृष्टि वाले कृपामय…
आज कोई बड़ा परिवर्तन करने का दिन नहीं है आज केवल एक बात समझने का दिन है कि “मन तुम्हारा मालिक नहीं है वह केवल एक उपकरण है” अक्सर हम…
अष्टावक्र गीता का नया अध्याय साधक को जीवन के सबसे गहरी भ्रमों से बाहर निकलने का प्रयास करता है । इस अध्याय में अष्टावक्र जनक को बताते हैं कि संसार…
“आज काम से कम 10 पेज किसी अच्छी पुस्तक के पढ़ो और एक महत्वपूर्ण सिख अपनी डायरी मेंलिखो “ आज का चैलेंज है प्रतिदिन कम से कम 10 पेज पढ़ना…
अष्टावक्र गीता का आठवां अध्याय अत्यंत सक्षिप्त हैं परंतु इसके चार श्लोक संपूर्ण आध्यात्मिक जीवन का सर समेटे हुए हैं । यहां अष्टावक्र बंधन और मोक्ष की ऐसी परिभाषा देते…
वेदांत और योग के अनुसार मनुष्य केवल शरीर नहीं है। हमारे भीतर कई स्तर काम करते हैं—मन, चित्त, अहंकार, बुद्धि, इंद्रियाँ, प्रवृत्ति और निवृत्ति। इन सबको समझ लेना आत्मज्ञान की…
इस अध्याय में वक्ता बदल जाते हैं । अब ऋषि अष्टावक्र नहीं बल्कि आत्मा ज्ञान प्राप्त कर चुके राजा जनक अपने अनुभव को व्यक्त कर रहे हैं पिछले अध्ययनों में…
पांचवी अध्याय में ऋषि अष्टावक्र राजा जनक को आत्मज्ञान की अंतिम अवस्था का रहस्य बताते हैं इस अध्याय का मुख्य विषय है लय अर्थात मन अहंकार और देहाभिमान का आत्मा…
हर महान ऋषि, संत, योद्धा और सफल व्यक्ति की नींव एक ही रही है — मन और इंद्रियों पर विजय। जिसने अपने मन को जीत लिया, उसने संसार को जीत…
View this post on Instagram जय मनभावन, जय अतिपावन, शोक नशावन शिवशंभो विपद विदारन, अधम उबारन, सत्य सनातन शिवशंभो सहज वचनहर, जलज नयनवर, धवल-वरन-तन शिवशंभो, मदन-कदन-कर पाप-हरण-हर, चरण मनन, धन…
View this post on Instagram जय रामेश्वर, जय नागेश्वर वैद्यनाथ, केदार हरे, मल्लिकार्जुन, सोमनाथ, जय, महाकाल ओंकार हरे, त्र्यम्बकेश्वर, जय घुश्मेश्वर भीमेश्वर जगतार हरे, काशी-पति, श्री विश्वनाथ जय मंगलमय अघहार…