दोस्तों जरा अपने ही जीवन की एक सच्चाई याद कीजिए , कितनी बार ऐसा हुआ कि जिस दिन आपके पास कोई काम नहीं था उसे दिन आपका मन सबसे ज्यादा बेचैन था । शरीर बिस्तर पर था , लेकिन मन पूरे संसार की यात्रा कर रहा था । कभी पुरानी यादों में कभी भविष्य की चिंता में कभी किसी व्यक्ति के बारे में तो , कभी ऐसी इच्छाओं में जिनका वास्तविक जीवन में कोई संबंध ही नहीं था । धीरे-धीरे आपने महसूस किया होगा कि जितना मन खाली रहता है उतना ही वह अपनी ही बनाई हुई कहानियों में उलजाने लगता है । यही मन के सबसे बड़ी चाल है , वह कभी भी खाली नहीं बैठता है अगर उसे कोई अच्छा काम नहीं मिलेगा तो वह अपने लिए बुरे काम ढूंढ लेगा ।
आज के युग में यह समस्या पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है , पहले इंसान के पास खाली समय कम होता था लेकिन आज मोबाइल में हर व्यक्ति को बाहर से व्यस्त और अंदर से खाली बना दिया है । हम घंटे तक स्क्रीन पर उंगलियां चलाते रहते हैं और scroll करते रहते हैं सोचते हैं कि हम व्यस्त हैं लेकिन सच तो यह है कि हमारा मन किसी सार्थक काम में नहीं लग रहा होता वह केवल एक वीडियो से दूसरे वीडियो एक पोस्ट दूसरी पोस्ट और एक इच्छा से दूसरी इच्छा तक भटकता रहता है यही कारण है कि आज इतनी सुविधा होने के बावजूद लोग पहले से ज्यादा तनाव चिंता वाले से और असंतोष का अनुभव कर रहे हैं मन को दिशा नहीं मिल रही है इसलिए वह भटक रहा है
कल्पना कीजिए कि आपके पास एक बहुत शक्तिशाली घोड़ा है । यदि आप उसे लगाम पड़कर सही दिशा में दौड़ आएंगे तो वह आपको मंजिल तक पहुंचा देगा । लेकिन लेकिन यदि उसे खुला छोड़ देंगे तो वही घोड़ा खेत भी उजाड़ देगा और स्वयं घायल हो जाएगा मन भी बिल्कुल ऐसा ही है यह आपका सबसे बड़ा मित्र भी बन सकता है और सबसे बड़ा शत्रु भी अंतर केवल इतना है कि उसकी लगाम आपके हाथ में है या नहीं ।
इसलिए जीवन में हमेशा कोई ना कोई उद्देश्य होना चाहिए । सुबह उठने का कारण होना चाहिए , शरीर को मजबूत बनाने के लिए व्यायाम बुद्धि को तेज करने के लिए अध्ययन , परिवार की जिम्मेदारियां निभाने के लिए कर्म और आत्मा को शांत करने के लिए ध्यान जप और स्वाध्याय है । जब आपका पूरा दिन अर्थ पूर्ण कार्यों से भरा होता है तब मन को भटकने का अवसर ही नहीं मिलता है वह धीरे-धीरे अनुशासित होने लगता है याद रखिए मन को हराने का तरीका उसे लड़ना नहीं बल्कि उसे सही काम में लगा देना है
लेकिन इसका अर्थ यह बिल्कुल नहीं है कि बिना रुके दिन रात काम करते रहो । मशीन भी लगा था चलती रहे तो गर्म होकर खराब हो जाती है । इसलिए काम के साथ विश्राम भी आवश्यक है । लेकिन वह विश्राम मोबाइल मनोरंजन और अलसी वाला नहीं बल्कि ध्यान मौन और प्रकृति के बीच कुछ समय और आत्म चिंतन वाला विश्राम होना चाहिए । यही विश्राम मन को नई शक्ति देता है ,
आज का युवा अवसर कहता है कि उसका मन पढ़ाई में नहीं लगता , साधना में नहीं लगता , लक्ष्य पर टिकता नहीं है पर सच यह है की मन कभी खाली नहीं रहता । यदि वह लक्ष्य पर नहीं लग रहा तो निश्चित थी किसी और जगह लगा हुआ है । इसलिए समस्या मन की नहीं , दिशा कि है । जिस दिन अपने अपने समय का मूल्य समझ लिया और हर घंटे का किसी सार्थक कार्यों से जुड़ा जोड़ दिया उसी दिन मन आपका सेवक बन जाएगा ।
याद रखिए जीवन में सफलता केवल प्रतिभा से नहीं मिलती बल्कि अनुशासित मन से मिलती है इसलिए अपने मन को खाली मत छोड़िए उसे हर दिन अच्छे विचार अच्छे कर्म अच्छा अध्ययन और अच्छी संगति दीजिए क्योंकि खाली मन धीरे-धीरे आपको नीचे गिरता है लेकिन उद्देश्य पूर्ण मन आपके वहां पहुंचा देता है जहां पहुंचने का सपना अपने वर्षों पहले देखा था । जिस दिन अपने अपने मन को दिशा दे दी उसी दिन से आपका जीवन बदलने शुरू हो जाएगा
