सिर्फ 7 दिन हुए लेकिन सच कहूं इन सात दिनों में मैंने अपने बारे में जितना सिखा या शायद पिछले 7 महीना में भी नहीं सीखा था पहले मुझे लगता था कि मेरी सबसे बड़ी समस्या समय की कमी है , फिर लगा कि पैसे की कमी है , कभी माहौल को दोष दिया , कभी किस्मत को । लेकिन अब धीरे-धीरे समझ में आ रहा है की असली समस्या इनमें से कोई नहीं । असली समस्या मेरी आदतें थी । वही आदतें जो हर सुबह मुझे 5 मिनट और सोने के लिए मानती थी वही आदतें जो कहती थी आज छोड़ दे कल से फिर शुरू करेंगे और वही आदतें जिन्होंने धीरे-धीरे मेरे सपने को भी छोटा कर दिया था
आज day 7 पर जब मैं सुबह उठा तो शरीर पहले से ज्यादा भारी लग रहा था । बैठक दंड करते समय हाथ कांप रहे थे दौड़ते हुए सांस तेज चल रही थी , मन बार-बार कह रहा था कि बस आज आराम कर ले एक दिन से क्या फर्क पड़ जाएगा लेकिन तभी मुझे अपना पुराना जीवन याद आया वही पुराने में जो हर बार एक दिन का बहाना बनाता था और देखते-देखते पूरा साल निकल जाता था मैंने वही तय कर लिया कि अब मन की नहीं सुनूंगा क्योंकि मैंने एक बात समझ ली की मन हमेशा आसान रास्ता चुनता है लेकिन जीवन बदलने वाले लोग आसान रास्ता नहीं सही रास्ता चुनते
आज मैंने महसूस किया कि इस चैलेंज का सबसे कठिन हिस्सा एक्सरसाइज नहीं है , जल्दी उठना नहीं है या अच्छा खाना खाना भी नहीं सबसे कठिन काम है अपने ही मन को हराना क्योंकि असली लड़ाई बाहर किसी इंसान से नहीं अपने अंदर बैठे उसे आलसी इंसान से जो हर दिन तुम्हें रोकने की कोशिश करता है वह कहता है कि तू नहीं कर पाएगा तो पहले भी तो हार चुका है लेकिन आज मैंने पहली बार उसे आवाज को जवाब दिया है हां पहले हार चुका हूं लेकिन इस बार नहीं इस बार मैं तब तक नहीं रुकूंगा जब तक खुद को बदल नहीं देता ।
मुझे अब समझ आने लगा है कि 180 दोनों का चैलेंज का मतलब सिर्फ शरीर बनाना नहीं है यह challenge एक नया चरित्र बनाने का है , ऐसा चरित्र जो वादे निभाता है जो किसी के देखने पर नहीं बल्कि अकेले में भी discipline से काम करता है क्योंकि असली जीत तब नहीं होती जब लोग तुम्हारी तारीफ करें असली जीत तब होती है जब रात को सोने से पहले आईने में देखकर तुम खुद से कहो कि आज मैं खुद को धोखा नहीं दिया
आज मैं पहले जैसा नहीं हूं अभी मैं परफेक्ट नहीं बनाऊं अभी भी गलतियां होगी अभी भी कई दिन ऐसे आएंगे जब मन हार मन को कहेगा , लेकिन अब मेरे अंदर एक नई सोच पैदा हो रही है अब मैं हर दिन जीतने की कोशिश नहीं कर रहा हूं बल्कि हर दिन उपस्थित रहने की कोशिश कर रहा हूं क्योंकि मैं समझा दिया है की success कीसी एक बड़े दिन में नहीं मिलती success सफलता उन छोटे-छोटे दिनों से बनती है जब कोई नहीं देख रहा होता फिर भी तुम अपना काम करतेहो।। अगर तुम भी यह चैलेंज कर रहे हो तो याद रखना 7 दिन पूरे होने कोई बहुत बड़ी उपलब्धि नहीं है लेकिन 7 दिन लगातार अपने आप से क्या हुआ वादा निभाना बहुत बड़ी बात है । यही सा दिन अगले 70 दिनों की नींव बनेगी और यही 70 दिन आगे चलकर तुम्हारे पूरे जीवन की दिशा बदल सकते हैं इसलिए आज खुद से सिर्फ एकवादा करो मैं रिजल्ट के पीछे नहीं भागूंगा मैं अपने daily habits हैबिट्स के पीछे भागूंगा क्योंकि जब आदतें बदलता है तब इंसान बदलता है और जब इंसान बदलता है तब उसकी पूरी किस्मत बदल जाती है
Day 7 ka संकल्प
“मैं वाहनों का गुलाम नहीं अपनी इंद्रियों का गुलाम नहीं मैं अपने मां का गुलाम नहीं हूं मैं अपनी आदतों का निर्माता हूं हर दिन हर हाल में मैं अपने 180 दोनों का चैलेंज एक और दिन ईमानदारी से पूरा करूंगा आज नहीं रुक तो कल मेरा भविष्य भी नहीं रुकेगा ”
