आज एक ऐसी कहानी की शुरुआत करते हैं जिसने हजारों वर्षों से करोड़ों लोगों की आर्थिक financial सोच बदल दी है . | और केवल धन कमाने की कहानी नहीं बल्कि यह उसे मानसिकता की कहानी है जो एक साधारण इंसान को असाधारण बना देती है । यह कहानी हमें ले जाती है प्राचीन बेबीलोन की गलियों में एक ऐसा नगर जिसे उस समय दुनिया का सबसे धनी और सबसे समृद्ध शहर माना जाता था । ऊंची ऊंची दीवारों सोने से सजे मंदिर , दूर दूर से आने वाले व्यापारी भरे हुए बाजार ऊँटों के कारवां और हर तरफ दिखाई देने वाली अपार संपत्ति ऐसा लगता था मानो इस नगर में रहने वाला हर व्यक्ति अमीर होगा लेकिन सच हमेशा वैसा नहीं होता , जैसे दिखाई देता है जहां एक और कुछ लोगों के घरों में सोने के सिक्के की खनक गूंजती थी , वहीं दूसरी और ऐसे भी लोग थे जो दिन-रात कठिन परिश्रम करने के बाद भी दो वक्त की रोटी के लिए संघर्ष कर रहे थे यही विरोधीअभ्यास इस कहानी की शुरुआत बनता है
इस बेबीलोन नगर में रहता था एक कुशल रथ निर्माता – बंसीर । उसके हाथों में अद्भुत कला थी । वैसे मजबूत और सुंदर रथ बनाता था – जिन्हें राजा सैनिक और व्यापारी गर्व से खरीदते थे लेकिन एक दिन वह अपने अधूरे रथ के सामने बैठा हुआ था उसके हाथ काम करना भूल चुके थे । और ” उसकी आंखें कहीं दूर शून्य में खोई हुई थी उसके घर के भीतर उसकी पत्नी चिंतित होकर उसे देख रही थी रसोई लगभग खाली हो चुकी थी , बच्चों की आवश्यकता है अधूरी थी ? घर में जरूरत थी लेकिन जेब खाली थी बंसीर के मन में एक प्रश्न बार-बार उठा था ? मैंने अपना पूरा जीवन मेहनत में लगा दिया !? फिर भी मेरे पास अपने रहने लायक धन क्यों नहीं आती है ? मेरी कमाई हर महीने कहां गायब हो जाती है मैं अपने सपनों के लिए कब जिऊंगा?”
इस समय वहां उसका सबसे घनिष्ठ मित्र को कोब्बी पहुंचा । कोब्बी एक प्रतिभाशाली संगीतकार था उसकी वाणी की धुन सुनकर लोग मंत्र मुग्ध हो जाते थे , उसके संगीत में आत्मा को छू लेने की शक्ति थी । लेकिन विडंबना यह था कि उसकी कला लोगों को आनंद तो देती थी पर उसे समृद्ध नहीं देती थी वह भी इस संघर्ष से गुजर रहा था जिसे बंसीर गुजर रहा था इसके चेहरे पर मुस्कान कम और चिंता अधिक थी । उसने बशीर के पास बैठते हुए का मित्र ” में दूसरों के जीवन में संगीत भरता हूं लेकिन मेरे अपने जीवन में अभाव की आवाज गुजरती है ? क्या केवल मेहनत करना ही पर्याप्त है ? यदि मेहनत ही सफलता रहस्य होती, तो हम आज बेबीलोन के सबसे धनी लोगों में होते “
दोनों मित्र घंटे तक जीवन के बारे में चर्चा करते रहे उन्होंने महसूस किया कि उन्होंने कभी आगे से नहीं किया । उन्होंने कभी काम से भागने की कोशिश नहीं की । सूरज निकलने से पहले काम शुरू करते और रात होने तक मेहनत करते । फिर भी उनके हाथ खाली थे तभी उनके भीतर एक गहरा सत्य जन्म लेने लगा। समस्या उनकी मेहनत में नहीं थी, बल्कि धन के प्रति उनकी समझ में थी । उन्होंने जीवन भर पैसा कमाना सीखा लेकिन कभी यह नहीं सीखा कि पैसे को अपने पास कैसे रोका जाए । वह हर महीने कमाते थे लेकिन जितना कमाते थे उससे थोड़ा अधिक खर्च करने की आदत बन चुके थे । पैसा उनके हाथों में मेहमान बनकर आता और बिना रुके चला जाता था। पहली बार उन्हें महसूस हुआ कि गरीबी केवल कम income। आय परिणाम नहीं होती , बल्कि गलत आर्थिक आदतों का परिणाम भी होती है । “
इसी बातचीत के दौरान कोब्बी अचानक बोला – ” क्या तुम्हें आर्केड याद है “? बंसीर ने सिर उठाकर उसकी और देखा । कोब्बी ने आगे कहां की , ” वह भी कभी हमारी ही तरह एक साधारण लेखक था ! उसकी आय भी समिति थी । लेकिन आज पूरा बेबीलोन उसे सबसे धनी व्यक्ति के रूप में जानता है । आखिर उसने ऐसा क्या सीखा जो हम नहीं सीख पाए । यह प्रश्न बिजली की तरह बसीर के मन में उतर गया उसने पहली बार अपनी किस्मत को दोष देना बंद किया । और किसी सफल व्यक्ति से सीखने का विचार क्या उसने महसूस किया कि शायद अमीर और गरीब के बीच सबसे बड़ा अंतर अवसर नहीं बल्कि ज्ञान होता है ।
अगली ही दिन दोनों मित्र आर्केड से मिलने पहुंचे। यह किसी धनवान व्यक्ति से सहायता मांगने नहीं बल्कि ज्ञान मांगने आए थे । आर्केड उनके बड़े सामान से स्वागत किया । उसके चेहरे पर घमंड नहीं था बल्कि अनुभव से जन्मी विनम्रता थी । बांसीर ने बिना किसी झझक से पूछा ” हम भी आपकी तरह धनवान बनना चाहते हैं हमें वह रहस्य बताइए जिसे आपको बेबीलॉन को सबसे समृद्ध व्यक्ति बना दिया । आर्केड मुस्कुराया । उसने कहां – “मैं तुम्हें कोई जादू नहीं बताऊंगा मैं केवल वह सिद्धांत बताऊंगा जिसने मेरे जीवन की दिशा बदल दी धन कमाने का पहला नियम इतना सरल है कि अधिकांश लोग उसे गंभीरता से लेते ही नहीं । ”
बांसीर ने उत्सुकता से पूछा , ” वह नियम क्या है । ”
आर्कड ने शांत स्वर में कहां की , ” जो भी तुम कमाते हो उसका कम से कम दसवां हिस्सा सबसे पहले अपने लिए बचा लो “। दोनों मित्र एक दूसरे का चेहरा देखने लगे उन्हें लगा कि इतनी साधारण बात कैसे किसी को अमीर बन सकते हैं ? बशीर ने तुरंत कहा – ” लेकिन हमारे खर्च पहले ही इतने अधिक हैं की बचत करना लगभग असंभव लगता है । आर्केड मुस्कुराया और बोला यही तुम्हारी सबसे बड़ी भूल है तुम सोचते हो कि खर्च बचने के बाद बचत होगी , जबकि सच्चाई इसका ठीक उल्टा है। पहले बचत होती है फिर उसे के अनुसार खर्च तय किया जाता है तुम्हारा खर्च इसलिए बढ़ता जाता है क्योंकि तुमने कभी बचत को अपनी पहली प्राथमिकता बनया ही नहीं “
आर्कड ने आगे समझाया कि हर इंसान अपने जीवन में तीन लोगों के लिए काम करता है – अपने परिवार के लिए , समाज के लिए और सबसे अंत में अपने लिए । लेकिन सबसे पहले तुम्हें अपने लिए काम करना सीखना होगा । जब भी तुम्हारी इनकम आय आए उसका पहला 10% तुम्हारा अपना है , उसे किसी भी परिस्थिति में खर्च मत करो । उसे ऐसे सुरक्षित रखो जैसे किसान बीज को संभाल कर रखता है क्योंकि वही छोटा सा बीज भविष्य में एक विशाल वृक्ष बनता है ठीक उसी प्रकार छोटी सी नियमित बचत भविष्य की आर्थिक स्वतंत्रता का वृक्ष बनतीहै
आर्कड की बातें केवल ” धन कमाने का तरीका नहीं थी बल्कि जीवन का दर्शन थी । उसने कहा कि धन एक सेवक की तरह है यदि तुम उसे सही दिशा दोगे तो वह तुम्हारे लिए दिन-रात काम करेगा । लेकिन यदि तुम उसे हर छोटी इच्छा पूरी करने में खर्च कर दोगे तो वह हमेशा तुम्हें छोड़कर चला जाएगा।
अमीर बनने का रहस्य अधिक कमाई में नहीं बल्कि अपनी कमाई की एक हिस्से को हमेशा अपने पास रखने में यही से बंसीर और कोब्बी के जीवन की दिशा बदलने लगी उन्होंने समझ लिया कि गरीबी उनकी किस्मत में नहीं थी बल्कि उनकी आदतों का परिणाम था ।
उसे दिन उन्होंने केवल एक नियम नहीं सीखा बल्कि एक नया जीवन जीना सीखा । उन्होंने जाना की धन कमाने से पहले धन को संभालना सीखना पड़ता है यही कारण है कि द रिचेस्ट मैन इन बेबीलॉन (the richest man in babylon) की यह पहले सिख आज भी उतनी शक्तिशाली जितनी हजारों वर्ष पहले थी पहले खुद को भुगतान करो अपने हर इनकम का कम से कम 10% हमेशा बचाओ यही छोटी है ऐसी आदत धीरे-धीरे धन का पहला स्तंभ बनती है आने वाले भाग में आर्कड बताएंगे कि केवल बचत करना ही पर्याप्त नहीं है बचाया हुआ धन आपके लिए काम कैसे करें ? निवेश कैसे किया जाए ? और सोने के सिक्कों को बढ़ाने का विज्ञान क्या है ? यही वह रहस्य है जो साधारण बचत को स्थाई संपत्ति में बदल देता है
