कैलाशनाथ
सदा साथ है उमापति
हे उमापति
आदि अनंत सर्वसंत
है उमापति
जपो उमापति
जोगी भेष है महेश संग महासती
जोगी भेष है महेश संग महा सती
मौन सब जगत
में गूंज ओमकार की
हे उमापति
हे उमापति
हे उमापति
हे उमापति
चंद्र भाल भुज विशाल पग पाताल है
काल के भी काल शंभू महाकाल है
हो मलंग
भस्म अंग मृग छाल है
जटाजूट संग
भूत नेत्र लाल है
आप महादेव परम ब्रह्म की गति
आप महादेव
परम ब्रह्म की गति
मौन सब जगत में गूंज ओमकार की
हे उमापति
हे उमापति
हे उमापति
हे उमापति
ओ
ओ
काशी में केदार में कैलाश में बसे
मेरे शंभूनाथ मेरी स्वास में बसे से
तुझसे कौन दूर तेरे पास में बसे
भोले तेरे नाम के विश्वास में बसे
आपसे ही मुक्ति ध्यान आपसे मती
आपसे ही मुक्ति ध्यान आपसे मती
मौन सब जगत
में गूंज ओमकार की
हे उमापति
हे उमापति
हे उमापति
हे उमापति
है जटा में गंगधार पाप को हरे जन्मजन्म
मां भवानी आपको वरे कौन तुझसे दूर
तेरे नाम से परे तू प्रलय जगत का शंभू
तू सृजन करे
कर कृपा जटाओं में गंगा उतार दी हर
कृपा जटाओं में गंगा उतार दी मान
सब जगत में गूंज ओमकार की हे उमापति
हे उमापति
हे उमापति
हे उमापति
ओ
डम डमाक
डमक डमक डमरूवाद है हु
उड़ शंखनाद
है फसे तीनों लोक में ये स्वर आबाद है
किंतु शंभू आपके गीतों में स्वाद
है छोटू की ये वंदना तुम्हें पुकारती
छोटू की ये वंदना तुम्हें पुकारती
मान सब जगत में गूंज ओमकार की हे उमापति
हे उमापति
हे उमापति
हे उमापति
जोगी भेश है महेश संग महासती
जोगी भेश है महेश संग महासती
मान सब जगत में गूंज ओमकार की हे उमापति
हे उमापति
