आज इस 180 day challenge 14 दिन है पिछले 13 दिनों में अपने मोन अनुशासन कृतज्ञता और धैर्य का अभ्यास किया अब समय है उसे अभ्यास का जो हर महान परिवर्तन की जड़ है आत्मनिरीक्षण self refiection संसार को बदलने से पहले स्वयं को देखना आवश्यक है अधिकांश लोग अपना पूरा जीवन दूसरों की गलतियां खोजने में लगा देते हैं लेकिन स्वयं को देखने के लिए कभी नहीं रुकते जो व्यक्ति स्वयं को नहीं जानता वह जीवन भर परिस्थितियों और लोगों को दोस्त देता रहता है लेकिन जो स्वयं को देखने का साहस कर लेता है उसके जीवन में परिवर्तन अवश्य आता है
मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु बाहर नहीं भीतर छिपा होता है क्रोध अहंकार अलसी भाई लोग और आसिम यह सब भीतर के शत्रु है जब तक हम इन्हें पहचानते नहीं तब तक इन पर विजय भी प्राप्त नहीं कर सकते यही कारण है कि भारत की प्राचीन ऋषि परंपरा में आत्मनिरीक्षण को साधना का अनिवार्य भाग माना गया वे प्रतिदिन अपने विचारों वाणी और कर्मों की समीक्षा करते थे क्योंकि सुधार वही संभव है या जागरूकता हो
कल्पना कीजिए कि यदि किसी वाहन का चालक कभी शीशे में पीछे ना देखे तो दुर्घटना होना निश्चित है उसी प्रकार यदि मनुष्य अपने जीवन की समीक्षा नहीं करता तो वह बार-बार वही गलतियां दोहराता रहता है आत्मनिरीक्षण व दर्पण है जिसमें हमारा वास्तविक स्वरूप दिखाई देता है यह दर्पण दूसरों के दोस्त नहीं दिखता बल्कि हमें स्वयं से परिचित कराता है
आज का अभ्यास है कि पूरे दिन अपने विचारों को साक्षी भाव से देखें जब क्रोध आए तो तुरंत प्रतिक्रिया देने के बजाय स्वयं से पूछे मैं क्रोधित क्यों हुआ जब आलस्य आए तो पूछे में इस कार्य से क्यों भाग रहा हूं जब किसी की सफलता देखकर मन विचलित हो तो पूछे क्या मुझे प्रेरणा लेनी चाहिए या तुलना करनी चाहिए यह छोटे-छोटे प्रश्न आपके भीतर छिपे सत्य को प्रकट करेंगे
रात को सोने से पहले काम से कम 20 मिनट केवल अपने दिन की समीक्षा करें सुबह से रात तक आपने क्या सोचा क्या कहा और क्या किया कौन सी आदत आपको अपने लक्ष्य के करीब ले गई और कौन सी आदत आपको पीछे खींचती रही यह अभ्यास किसी अपराध बोध के लिए नहीं है इसका उद्देश्य केवल स्वयं को समझना और अगले दिन बेहतर बनाना है हर दिन यदि आप केवल 1% सुधार कर लेते हैं तो एक वर्ष बाद आपका व्यक्तित्व पूरी तरह बदल सकता है
याद रखिए जो व्यक्ति अपनी गलती स्वीकार कर लेता है वही वास्तविक अर्थों में बुद्धिमान है अहंकार करता है मैं हमेशा सही हूं लेकिन विवेक कहता है मैं हर दिन कुछ नया सीख सकता हूं आत्म निरीक्षण अहंकार को तोड़ता है और विनम्रता को जन्म देता है जहां विनम्रता होती है वही ज्ञान का प्रवेश होता है
आज अपनी डायरी में लिखिए
आज मैं सबसे बड़ी कौन सी गलती की
मैंने आज कौन सा अच्छा कार्य किया जिस पर मुझे गर्व है
मेरी सबसे कमजोर आदत कौन सी है
कल मैं अपने भीतर कौन सा एक सुधार अवश्य करूंगा
आज का मंत्र
जो स्वयं को देख लेता है उसे संसार को दोस्त देने की आवश्यकता नहीं रहती आत्म निरीक्षण ही आत्मविश्वास का पहला और सबसे महत्वपूर्ण कदम है
याद की सफलता केवल बाहरी उपलब्धियां का नाम नहीं है वास्तविक सफलता अपने भीतर के अंधकार को पहचान कर उसे प्रकाश में बदल देना है प्रतिदिन कुछ मिनट स्वयं के साथ बताइए क्योंकि दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण व्यक्ति जिसे आपको समझना है वह आप स्वयं है जब आप स्वयं को जान लेंगे तब जीवन ही हर दिशा स्पष्ट होने लगेगी
