माँयलो जाणे रे अमर

राम भज ले प्राणियों, कर कर मन में सोच ।

बार-बार नहीं आवसी, आ मिनख जनम री मौज ।।



माँयलो जाणे रे अमर म्हारी काया जी,

लोभीड़ो जाणे रे सुन्दर म्हारी काया।

धन रे जोबन बादळ वाळी छाया जी,

थोड़ा जीणा खातिर काँई जोड़े माया ॥



* लोहारी जंजीर जकड़ बंधिया हाथी जी,

अन्त समय में थारो कोई नहीं साथी ॥

माँयलो जाणे रे अमर म्हारी काया, जी ॥



* सोना हन्दा महल रूपा हन्दा साजा जी,

राज करे वो काया नगरी रो राजा ॥

माँयलो जाणे रे अमर म्हारी काया, जी ॥



* धँस गयो महल बिखर गया साजा जी,

बिलख्यो फिरे रे काया नगरी रो राजा ॥

माँयलो जाणे रे अमर म्हारी काया, जी ॥



* जळ की तो भीत, पवन की टाटी जी,

उड़ गया हंस पड़ी रहगी माटी ॥

माँयलो जाणे रे अमर म्हारी काया, जी ॥



एक कुओ ने पाँच पणिहारी जी,

एक रे नेजु से भरे न्यारी-न्यारी ॥

माँयलो जाणे रे अमर म्हारी काया, जी ।।



* जल बिच जमुना ऊपर बसे काशी जी,

वहाँ पर राज करे अविनाशी ।

माँयलो जाणे रे अमर म्हारी काया, जी ।



सूख गया नीर सूखण लागी क्यारी जी,

बिलखी फिरे रे ए तो पाँचू पणिहारी ।।

माँयलो जाणे रे अमर म्हारी काया, जी ।।

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