ब्रह्मचर्येण तपसा देवा मृत्युमुपाघ्नत।
ब्रह्मचर्येण ऋषयः सत्यं ब्रह्म च लेभिरे॥
वैदिक परंपरा में ब्रह्मचर्य को आत्म बल ज्ञान और उच्च जीवन का आधार माना गया है । इसका अर्थ केवल इंद्रिय संयम नहीं बल्कि अपने शरीर मन और बुद्धि को एक महान उद्देश्य के लिए अनुशासित करना है ।
ब्रह्मचर्य केवल त्याग नहीं , शक्ति है
आज का समाज सफलता चाहता है लेकिन अनुशासन नहीं । हर कोई शक्तिशाली बनना चाहता है लेकिन अपनी इच्छाओं पर नियंत्रण नहीं करना चाहता । हर कोई सम्मान चाहता है लेकिन चरित्र निर्माण के लिए आवश्यक तपस्या से बचना चाहता है । यही आधुनिक युग का सबसे बड़ा विरोधभ्यास है ।
प्राचीन भारत में किसी व्यक्ति का मूल्य उसके धन से नहीं बल्कि उसके तेज से आंका जाता था । यह तेज केवल चेहरे की चमक नहीं थी । वह उसके व्यक्तिगत कि वह आभा थी जो सत्य , संयम , ज्ञान , सेवा और आत्मविश्वास से उत्पन्न होती थी । जब कोई ऋषि आश्रम में प्रवेश करता था या कोई योद्धा रणभूमि उतरत था तो उसके वस्त्र नहीं उसका चरित्र बोलता था ।
आज के इस modern generation में लोग बाहरी आकर्षण पर करोड़ों रुपए खर्च कर रहे हैं – महंगे कपड़े, जूते ,परफ्यूम , कॉस्मेटिक और filter image । लेकिन यदि भीतर self confidence नहीं है , मन अशांत है और uncontrol desire इच्छाओं पर नियंत्रण नहीं है , तो बाहरी चमक अधिक समय तक टिक नहीं सकती । वास्तविक आकर्षण हमेशा भीतर से जन्म लेता है ।
इतिहास गवाह है कि जिन लोगों ने स्वयं पर विजय प्राप्त की उन्होंने संसार पर प्रभाव डाला । चाहे वह एक तपस्वी हो , एक वैज्ञानिक , एक खिलाड़ी , एक सैनिक या एक महान नेता उनके सबसे बड़ी शक्ति उनकी self control थी। जिसे स्वयं को जीत लिया उसके लिए संसार की कोई भी चुनौती असंभव नहीं रहती ।
ब्रह्मचर्य का अर्थ इच्छाओं को दबाना नहीं है । बल्कि उन्हें दिशा देना है। नदी जब बिना किनारो के बहती है तो बाढ़ लाती है , वही नदी जब बांध और दिशा प्राप्त करते हैं , तो बिजली बनती है खेतों को सींचती हैं और करोड़ों लोगों का जीवन बदल देती है , मनुष्य की ऊर्जा भी ऐसी ही है । यदि वह बिखर जाए तो दुर्बलता पैदा करती है यदि वह संयमित हो जाए तो सृजन करती है ।
आज का सबसे बड़ा संकट ऊर्जा की कमी नहीं , बल्कि ऊर्जा का बिखराव है । Notification , short video , uncontrol entertainment , short time pleasure । हमारे ध्यान को हर दिशा में खींच रहे हैं । परिणाम यह है कि मनुष्य घंटे व्यस्त रहता है लेकिन जीवन में आगे नहीं बढ़ता । ब्रह्मचर्य हमें सिखाता है कि अपनी सबसे मूल्यवान संपत्ति ध्यान और ऊर्जा को व्यर्थ में नहीं बहाओ ।
याद रखिए महान व्यक्ति तत्व अचानक नहीं बनते हैं । यह प्रतिदिन लिए गए छोटे-छोटे सही निर्णय से बनते हैं । हर बार जब आप किसी प्रलोभन को ना कहते हैं , तब आपका चरित्र पहले से अधिक मजबूत होता है । हर बार जब आप अपने लक्ष्य को क्षणिक सुख से ऊपर रखते हैं तब आपका भविष्य बदलता है
संकल्प
” मै क्षणिक सुख के लिए अपने भविष्य का सौदा नहीं करूंगा । मेरा चरित्र मेरी सबसे बड़ी पहचान है । मैं अपनी उर्जा समय और ध्यान को महान उद्देश्य में लगाकर तेजस्वी अनुशासित और प्रभावशाली जीवन का निर्माण करूंगा। ”
