आज कोई बड़ा परिवर्तन करने का दिन नहीं है आज केवल एक बात समझने का दिन है कि “मन तुम्हारा मालिक नहीं है वह केवल एक उपकरण है”

अक्सर हम सोचते हैं कि हमारी आदतें बहुत शक्तिशाली है  , क्रोध आ गया , आलस  आ गया , वासना आ गई  , नकारात्मक विचार आ गया इसलिए हम मजबूर हैं । लेकिन सच्चाई यह है कि कोई भी आदत तुम्हें तब तक नियंत्रित नहीं कर सकती जब तक तुम उसे अपनी अनुमति नहीं देते

जब मन कहे ” बस एक बार कर लो ” तब तुरंत उसके पीछे मत भागो , रुक जाओ ! उसे देखो !  साक्षी बनो ! स्वयं से पूछो कि –  क्या यह विचार वास्तव में मेरा है  ?” यह केवल मन एक पुरानी लहर  है? तुम पाओगे कि विचार अपने आप उठाते हैं और अपने आप चले भी जाते हैं उन्हें शक्ति तुम्हारी स्वीकृति से मिलती है ।

अष्टावक्र का संदेश भी यही है कि तुम मन नहीं हो तुम उसके देखने वाले हो । जिस क्षण तुम देखने वाले बन जाते हो उसे क्षण मन  की पकड़ कमजोर होने लगती है आदतें इसलिए नहीं चलती कि वह शक्तिशाली है  , वे इसलिए चलते हैं क्योंकि हम अपनी हम अनजाने में उन्हें बार-बार अनुमति दे देते हैं ।

कोई युद्ध मत करो ।  केवल जागो  । पूरे दिन अपने को देखते रहो ।  जब कोई ऐसी आदत बुलाई जो अंत में दुख ,  कमजोरी या पछतावा देती है तो उसे लड़ना भी मत केवल मुस्कुरा कर कह दो ” तुम्हें देख रहा हूं लेकिन तुम्हें अनुमति नहीं देता

मन एक सेवक ,  स्वामी नहीं । उसकी हर इच्छा को पूरा करना आवश्यक नहीं है जिस दिन तुमने अनुमति देना बंद कर दिया उसी दिन पुरानी आदतों की सुखना शुरू हो जाती है

आज बस पूरा दिन खुद को देखते रहो करो कुछ मत बस अपने अंदर चल रहे विचारों को देखो कैसे पल। पल बदलता रहता है ।

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