“आज काम से कम 10 पेज किसी अच्छी पुस्तक के पढ़ो और एक महत्वपूर्ण सिख अपनी डायरी मेंलिखो “
आज का चैलेंज है प्रतिदिन कम से कम 10 पेज पढ़ना । बहुत से लोग जीवन में आगे बढ़ना चाहते हैं लेकिन सीखना नहीं चाहते की सफलता चाहते हैं लेकिन ज्ञान प्राप्त करने पर धैर्य नहीं रखते। याद रखो हर महान व्यक्ति पहले एक महान विद्यार्थी था उसने अपने जीवन को केवल अनुभव से नहीं बल्कि पुस्तकों से भी समृद्ध बनाया एक अच्छी पुस्तक वर्षों का अनुभव कुछ घंटे में तुम्हारे सामने रख देती हैं जिस ज्ञान को प्राप्त करने में किसी महापुरुष को पूरा जीवन लग गया उसे तुम कुछ दिनों में पढ़ कर समझ सकते हो यही पुस्तक का शक्ति है ।
आज का उसे सूचना का है लेकिन ज्ञान का नहीं लोग घंटे से मीडिया पर स्क्रोल करते रहते हैं लेकिन 20 मिनट तक पुस्तक नहीं पढ़सकते। परिणाम यह होता है कि उनका मन छोटी-छोटी बातों में उलझा रहता है और उनकी सोच सीमित बनी रहती है पुस्तक मां को अच्छा उठाती हैं वह तुम्हें नए विचार देते हैं नई दृष्टि देती हैं और जीवन को देखने का नया तरीका सिखाती है यदि तुम आध्यात्मिक बनना चाहते हो तो गीता उपनिषद स्थापित गीता और स्वामी विवेकानंद जैसे महापुरुषों को पढ़ो यदि सफल बनाना चाहते हो तो महान लोगों की जीवनी पढ़ो यदि मन को मजबूत बनाना चाहते हो तो ऐसे गलत पढ़ो जो तुम्हें भीतर में से बदल दे
सोचो यदि तुम प्रतिदिन केवल 10 पेज पढ़ते हो तो 1 महीने में लगभग 300 पेज और 1 वर्ष में 3600 से अधिक पेज पढ़ सकते हो । इसका अर्थ है कि तुम 1 वर्ष में कई जीवन बदल देने वाली पुस्तकों का ज्ञान प्राप्त कर सकते हो । यही छोटी आदत धीरे-धीरे तुम्हारे व्यक्ति तक विचारों और निर्णय को बदल देते हैं । जिस व्यक्ति का मन श्रेष्ठ विचारों से भरा होता है उसे संसार की नकारात्मक आसानी से प्रभावित नहीं कर सकती । इसलिए यदि मन को श्रेष्ठ बनाना है , चरित्र को उत्साह उठाना है और जीवन को दिशा देनी है , तो पुस्तक को अपना मित्र बनाओ ।
आज से एक नियम बनाओ जिस प्रकार शरीर को भोजन की आवश्यकता होती हैं उसी प्रकार बुद्धि को भी ज्ञान का भोजन चाहिए ।
यदि शरीर को प्रतिदिन भोजन मिलता है लेकिन बुद्धि को नहीं तो व्यक्ति शारीरिक रूप से तो जीवित रहता है परंतु मानसिक और आध्यात्मिक रूप से कमजोर हो जाता है इसलिए हर दिन कुछ ना कुछ पढ़ो धीरे-धीरे तुम्हारी सोच बदलने लगेगी और जब सोच बदलती है तब जीवन बदल जाता है
“मैं अपने मन को केवल मनोरंजन से नहीं ज्ञान से भरूंगा क्योंकि जिस दिन मैं पढ़ना शुरू किया उसी दिन मेरा विकास शुरू हो गया “
