!! काया ने सिणगार कोर्यालियाँ !
काया ने सिणगार कोयलियाँ,
पर मण्डली मत जाइजो ए ।
पर मण्डलीरा नहींर भरोसा,
अध बिच में रूळ जावोए ।
काया ने सिणगार कोयलियाँ,
ओओं हरिओम ।
गहरो फूल रोहिड़ा रो कहिजे,
वे फुलड़ा मत लाइजो ए ।
थोड़ा फूल घणां कर मानो,
फूल हंजारी गुल लाइजो ए ।
काया ने सिणगार ।….
खारे समदरो खारो पाणी,
वो पाणी मत लाइजो ए
थोड़ो नीर घणो कर मानो,
नीर गंगा जळ लाइजो ए
काया ने सिणगार ।….
पिछम भोम में उभो खेजड़ो,
उण छाया मत जाइजो र ।
उत्तर – दक्षिण रो बाजे बायरो,
काँटा में रूळ जावो
ए काया ने सिणगार ।….
बाई मीरां री भजन मण्डली,
उण मण्डली भल जाइजो ए ।
उण मडली रा खरा रे भरासा,
डूबतड़ी तिर जावो ए ।
काया ने सिणगार
