Chankya niti in hindi/ सम्पूर्ण चाणक्य नीति/ चाणक्य नीति
अध्याय दुसरा श्लोक 7 , 8 मनसा चिन्तितं कार्यं वाचा नैव प्रकाशयेत् । मन्त्रेण रक्षयेद् गूढं कार्ये चाऽपि नियोजयेत् ।। मन से सोचे हुए कार्य को वाणी द्वारा प्रकट नहीं…
अध्याय दुसरा श्लोक 7 , 8 मनसा चिन्तितं कार्यं वाचा नैव प्रकाशयेत् । मन्त्रेण रक्षयेद् गूढं कार्ये चाऽपि नियोजयेत् ।। मन से सोचे हुए कार्य को वाणी द्वारा प्रकट नहीं…
दुसरा अध्याय श्लोक 5 , 6 परोक्षे कार्यहन्तारं प्रत्यक्षे प्रियवादिनम्। वर्जयेत्तादृशं मित्रं विषकुम्भं पयोमुखम् ।। जो पीठ पीछे कार्य को बिगाड़े और सामने होने पर मीठी-मीठी बातें बनाए, ऐसे मित्र…
परोक्षे कार्यहन्तारं प्रत्यक्षे प्रियवादिनम्। वर्जयेत्तादृशं मित्रं विषकुम्भं पयोमुखम् ।। जो पीठ पीछे कार्य को बिगाड़े और सामने होने पर मीठी-मीठी बातें बनाए, ऐसे मित्र को उस घड़े के समान त्याग…
यस्य पुत्रो वशीभूतो भार्या छन्दाऽनुगामिनी। विभवे यश्च सन्तुष्टस्तस्य स्वर्ग इहैव हि।। जिसका बेटा वश में रहता है, पत्नी पति की इच्छा के अनुरूप कार्य करती है और के कारण पूरी…
यस्य पुत्रो वशीभूतो भार्या छन्दाऽनुगामिनी। विभवे यश्च सन्तुष्टस्तस्य स्वर्ग इहैव हि।। जिसका बेटा वश में रहता है, पत्नी पति की इच्छा के अनुरूप कार्य करती है और जो व्यक्ति धन…
विषादप्यमृतं ग्राह्यममेधयादपि काञ्चनम्। नीचादप्युत्तमा विद्या स्त्रीरत्नं दुष्कुलादपि ।। विष में भी यदि अमृत हो तो उसे ग्रहण कर लेना चाहिए। अपवित्र और अशुद्ध वस्तुओं में भी यदि सोना अथवा मूल्यवान…
आतुरे व्यसने प्राप्ते दुर्भिक्षे शत्रु-संकटे । राजद्वारे श्मशाने च यस्तिष्ठति स बान्धवः ।। किसी रोग से पीड़ित होने पर, दुख आने पर, अकाल पड़ने पर, शत्रु की ओर से संकट…
लाकयात्रा भय लज्जा दाक्षिण्य त्यागशीलता।पञ्च यत्र न विद्यन्ते न कुर्यात् तत्र संस्थितिम् ।। जहां लोकयात्रा अर्थात जीवन को चलाने के लिए आजीविका का कोई साधन न हो, व्यापार आदि विकसित…
यस्मिन् देशे न सम्मानो न वृत्तिर्न च बान्धवाः । न च विद्याऽऽगमः कश्चित् तं देशं परिवर्जयेत् ।। जिस देश में आदर-सम्मान नहीं और न ही आजीविका का कोई साधन है,…
आपदर्थे धनं रक्षेद् दारान् रक्षेद्धनैरपि। आत्मानं सततं रक्षेद् दारैरपि धनैरपि ।। किसी कष्ट अथवा आपत्तिकाल से बचाव के लिए धन की रक्षा करनी चाहिए और धन खर्च करके भी स्त्रियों…
दुष्टा भार्या शठं मित्रं भृत्यश्चोत्तरदायकः । ससर्पे च गृहे वासो मृत्युरेव न संशयः ।। दुष्ट स्वभाव वाली, कठोर वचन बोलने वाली, दुराचारिणी स्त्री और धूर्त, दुष्ट स्वभाव वाला मित्र, सामने…
मूर्खशिष्योपदेशेन दुष्टस्त्रीभरणेन च। दुःखितैः सम्प्रयोगेण पण्डितोऽप्यवसीदति ।। मूर्ख शिष्य को उपदेश देने, दुष्ट-व्यभिचारिणी स्त्री का पालन-पोषण करने, धन के नष्ट होने तथा दुखी व्यक्ति के साथ व्यवहार रखने से बुद्धिमान…
In the world of finance and wealth management, there’s a myriad of strategies, tips, and advice on how to make money. However, one often overlooked aspect is the psychological framework…
अमीर बनना एक सपना हो सकता है जिसे बहुत से लोग देखते हैं, लेकिन कुछ लोग इसे सच करते हैं। अमीरी की दिशा में आगे बढ़ने के लिए, आपको समय,…
नई चीज़ें सीखने के नियमों में सबसे महत्वपूर्ण बात है खुद को खुले दिमाग़ से स्वीकारना। नई जानकारी को स्वीकार करने के लिए, हमें अपने विचारों और धारणाओं को खोलकर…
स्वागत है आपका हमारे नए ब्लॉग पोस्ट पर! आज हम एक महत्वपूर्ण विषय पर चर्चा करने वाले हैं – “अपने आप में निवेश करें” investing in you “. बहुत से…
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