हो राम नाम मतवाला है मां अंजनी का लाला है / maa anjani ka lala hai , Hanuman ji bhajan
वह राम नाम मतवाला है मां अंजनी का लाल है वो लाल लंगोटा वाला है मां अंजनी का लाल है सब सुख लहे तुम्हारी शरणा , सब सुख लहे तुम्हारी…
वह राम नाम मतवाला है मां अंजनी का लाल है वो लाल लंगोटा वाला है मां अंजनी का लाल है सब सुख लहे तुम्हारी शरणा , सब सुख लहे तुम्हारी…
अष्टावक्र गीता का सातवां प्रकरण राजा जनक की आत्म साक्षात्कार से उपजी वाणी है यहां गुरु नहीं बोल रहे यहां ज्ञान स्वयं बोल रहा है । आत्मा= अन्नत महासमुंद संसार=…
|| श्री हनुमान स्तुति|| मनोजवं मारुत तुल्यवेगं,जितेन्द्रियं, बुद्धिमतां वरिष्ठम् ॥वातात्मजं वानरयुथ मुख्यं,श्रीरामदुतं शरणम प्रपद्धे ॥ ।। आरती।। आरती कीजे हनुमान लला की । दुष्ट दलन रघुनाथ कला की।। जाके बल…
हरि हरि हरि हरि हरि हरि हरि हरि कृष्ण कृपा हो तभी कृष्ण का नाम ले सकोगे , कृष्ण कृपा हो तभी कृष्ण का नाम ले सकोगे , कृष्ण कृपा…
2026 आ गया है , लेकिन याद रखना _ साल बदलने से जिंदगी नहीं बदलती, जिंदगी तब बदलती है जब इंसान अपनी गलतियां बदलता है । 2026 में यह एक…
है धन्य तेरी माया जग में, ओ दुनिया के रखवाले , शिव शंकर डमरू वाले , शिव शंकर भोले भाले जो ध्यान तेरा धर ले मन में , वह जग…
यह अध्याय न साधना सीखता है , ना नियम , न तपस्या , यह केवल बताता है कि बंधन कब है और मोक्ष कब है ? “जिस काल में चित…
|| पवन तनय संकट हरन, मंगल मूरत रूप राम लखन सीता सहित, हृदय बसह सुरभूप बोलिए संकट मोचन हनुमान की जय || ओ मोरे संकट के कटैया हनुमान हमारे संकट…
Ashtavakra Gita chapter 9 slok 6 details explain * “क्या गुरु आपको मुक्त कर सकता है?* क्या कोई और आपकी मुक्ति की गारंटी ले सकता है?* या मुक्ति एकदम व्यक्तिगत,…
वासना ही संसार है इसलिए सब वासनाओं को छोड़ दें वासना का त्याग ही संसार का त्याग है अब तू जहां चाहे , जैसे चाहे , स्थित हो जा ||…
||दोहा || लाल देह लाली लसे ,अरु धरि लाल लंगूर | ब्रज दे दानव दलन , जय जय जय कपि सूर || बाल समय रवि भक्षी लियो तब तीनहुं लोक…
अष्टावक्र गीता का 9 अध्याय त्याग वैराग्य और आत्म स्वरूप में स्थित होने की चरम शिक्षा देता है यह अध्याय कर्म , अकर्म , ज्ञान , भोग , मत मतांतर…
अष्टावक्र गीता का 11 अध्याय में हमें ” निश्चय शक्ति ” ( firm conviction) सीखना है । ऋषि अष्टावक्र राजा जनक को बताते हैं कि जब तक इंसान की बुद्धि…
न ते सङ्गोऽस्ति केनापि कि शुद्धस्त्यक्तुमिच्छसि ।संघातविलयं कुर्वन्नेवमेव लयं व्रज ॥५. १ ॥ आ. गीता हे शुद्ध स्वरूप शिष्य ! जब तेरा किसी भी वस्तुओं से कोई वास्तविक संबंध ही…
दोहा – जोगी जंगम से बड़ा, संन्यासी दरवेश, छटा दर्शन ब्रह्म का, इनमे मीन न मेष । कोई बताओ जोगी आवता, ज्याने लाख बधाई, जोगी ढूंढत म्हाने जुग भया, कोई…
ऊंचा ऊंचा पहाड़, भैरूजी सोनाणा रा सोहवे ओ । काला गोरा भैरू, म्हारो मनहो मोवे ओ, भैरू लटियालो । हाँ, रे भैरू लटियालों, औ खेतलाजी नाम दिरायों ओ। भैरू लटियालो…
कंचन वाली काया, सैलानी मैं तो पावना, एक दिन जावाला, पाछा कोणी आवाला ।। बोलो बोलो अमृत वाणी, इन मुखड़ा सु, फूला वाली परमलिसोड़ा, अमर पद पावाला, कँचन वाली काया,…