मौन की शक्ति : जब शब्द रुकते हैं तब आत्मा बोलती है
आज इस 180 day challenge का दसवां दिन है पिछले 9 दिनों में आपने अपने शरीर मन आदतों और डिजिटल जीवन को देखना शुरू किया जब समय है उस शक्ति को जानने का जिसे आज की दुनिया सबसे अधिक खो चुकी है मौन अधिकांश लोग यह समझते हैं कि मौन केवल बोलना बंद कर देना है लेकिन वास्तविक मौन शब्दों का नहीं बल्कि मन के शोर का अंत है यदि बाहर शांति हो लेकिन भीतर विचारों का तूफान चलता रहे तो वह मन नहीं है सच्चा मोन तब जन्म लेता है जब मन अनावश्यक प्रतिक्रिया देना छोड़ देता है और केवल साक्षी बनकर देखना सीखता है
आज का संसार शोर से भरा हुआ है हर क्षण कोई न कोई हमें कुछ ना कुछ कर रहा है मोबाइल नोटिफिकेशन सोशल मीडिया समाचार विज्ञापन बहस राजनीति और अंतहीन मनोरंजन धीरे-धीरे हमने स्वयं की आंतरिक आवाज सुना ही बंद कर दिया है हम दूसरों की राय तो सुनते हैं लेकिन अपने अंतरात्मा की पुकार नहीं सुन पाते यही कारण है कि बाहर सब कुछ होते हुए भी भीतर बेचैनी बनी रहती है मोन उस खोए हुए संबंध को पूर्ण स्थापित करता है
जब आप कम बोलते हैं तब आप अधिक सुनते हैं जब आप अधिक सुनते हैं तब आप अधिक समझते हैं और जब आप समझने लगते हैं तब जीवन बदलने लगता है हर अनावश्यक शब्द आपकी ऊर्जा को बाहर ले जाता है जबकि मोन उसी ऊर्जा को भीतर सचित करता है इसीलिए इतिहास के महान ऋषि योगी और संत समय-समय पर मोन साधना करते थे वे जानते थे कि ज्ञान केवल पुस्तकों से नहीं बल्कि शांत मन से प्रकट होता है
आज का अभ्यास केवल चुप रहना नहीं है आज का अभ्यास है बिना आवश्यकता कोई बात ना करना यदि बोलना जरूरी हो तो कम शब्दों में प्रेम पूर्वक और सत्य बोले किसी की आलोचना न करें किसी से व्यर्थ बहस ना करें किसी को अपनी बात सिद्ध करने की कोशिश ना करें केवल देखें कि आपका मन कितनी बार कुछ कहने के लिए बेचैन होता है हर बार स्वयं से पूछे क्या यह बोलना वास्तव में आवश्यक है यदि उत्तर नहीं है तो मुस्कुराइए और मोन को चुनिए
दिन में कम से कम 30 मिनट पूर्ण मोन में बैठे, ना मोबाइल न संगीत न किताब न बातचीत केवल अपनी श्वास को देखें| विचार आएंगे जाएंगे स्मृतियां आएगी योजनाएं बनेगी लेकिन आप केवल साक्षी बने रहे धीरे-धीरे आप अनुभव करेंगे कि विचारों की गति कम होने लगी है उसी शांति में आत्मविश्वास जन्म लेता है निर्णय स्पष्ट होते हैं और भीतर की स्थिरता प्रकट होने लगती है
याद रखिए हर उत्तर तुरंत देना आवश्यक नहीं होता हर बहस जितना बुद्धिमानी नहीं होती कई बार मोन सबसे शक्तिशाली उत्तर होता है जो व्यक्ति स्वयं पर नियंत्रण रख सकता है वही संसार में किसी भी परिस्थिति का सामना धैर्य पूर्वक कर सकता है मोन हमें प्रतिक्रिया से उत्तरदायित्व की ओर ले जाता है यह हमें भावनाओं का दास नहीं बल्कि उनका स्वामी बनाता है
आज रात सोने से पहले अपनी डायरी में लिखिए :-
आज मैंने कितनी बार बिना आवश्यकता बोलने से स्वयं को रोका?
मौन के दौरान मेरे मन में सबसे अधिक कौन से विचार आए ?
क्या मैं स्वयं के साथ सहज रह पाया?
क्या मोन ने मुझे अधिक शांत और जागरूक बनाया ?
आज का मंत्र :-
“कम बोलो गहरा सोचो ध्यान से सुनो और स्वयं को जानो मोन कमजोरी नहीं बल्कि आत्म बल की सर्वोच्च अभिशक्ति है ”
याद रखिए यह 180 दिनों की यात्रा केवल आदतें बदलने की नहीं बल्कि स्वयं को पहचानने की यात्रा है हर दिन आप अपने भीतर की एक नई परत को देख रहे हैं यदि आज मौन की शक्ति को अपनाते हैं तो आने वाले दिनों में आपका मन अधिक स्थित आपकी वाणी अधिक प्रभावशाली और आपका जीवन अधिक सार्थक होता जाएगा सच्ची शक्ति और शोर में नहीं बल्कि उस मोन में छिपी होती है जहां से ज्ञान करुणा और आत्मबोध का जन्म होता है।
