जिस पर तुम्हारा नियंत्रण नहीं उसे बदलने की कोशिश मत करो | focus on what you control life lessons

कभी ध्यान दिया है कि हम अपना अधिकांश जीवन उन चीजों को बदलने की कोशिश में बिताते हैं जो हमारे नियंत्रण में ही नहीं है ?

हम चाहते हैं कि लोग हमारी तरह सोच,  हमारी तरह व्यवहार करें , हमारी पसंद को पसंद करें और , हमारी ना पसंद को ना पसंद करें लेकिन यहीं से दुख की शुरुआत  होती है । इस संसार में हर व्यक्ति अपने अनुभव , संस्कारों ,  विश्वासों और जीवन की घटनाओं का परिणाम है ।  जो कुछ वह देखता है सुनता है और महसूस करता है वही उसके व्यक्तितत्व का हिस्सा बन जाता है इसलिए हर व्यक्ति की दुनिया अलग होती हैं हम सभी एक ही पृथ्वी पर रहते हैं ,  लेकिन हर कोई अपनी अपनी मानसिक दुनिया में जी रहा है

मान लो कि तुम्हें हास्य फिल्मों में प्रेम है तुम्हें लगता है कि जीवन को हल्केपन से जीना चाहिए हर परिस्थिति में मुस्कुराना चाहिए और अंधेरे में भी उजाला ढूंढना चाहिए । लेकिन तुम्हारे परिवार का कोई सदस्य डरावनी और रहस्यमय फिल्में देखना पसंद करता है तो मैं यह अजीब लग सकता है । तुम्हारे मन में विचार आ सकता है कि वह व्यक्ति दुखी हैं नकारात्मक है या से स्वयं को मानसिक रूप से परेशान कर रहा है फिर तुम उसे समझने लगते हो कि उसे भी वही देखना चाहिए जो तुम देखते हो । लेकिन क्या वास्तव में वह गलत है ? या सिर्फ अलग है  ? अक्सर हम अंतर को गलती समझ देते हैं जो हमारी सोच से मेल नहीं खाता उसे हम सुधारने योग्य समस्या मान लेते हैं । जबकि सत्य यह है कि हर व्यक्ति अपने अनुभव के अनुसार जीवन को देखा है जो तुम्हें अंधेरे लगता है हो सकता है कि किसी दूसरे के लिए वही जिज्ञासा और रोमांच का स्त्रोत हो

जब भी हमारे भीतर किसी को बदलने की इच्छा होती है उसके पीछे एक छिपा हुआ अहंकार होता है , । अहंकार कहता है कि ”  मैं सही हूं और सामने वाला गलत है”

यही विचार हमें दूसरों का सुधारक बना देता है हम मान लेते हैं कि हमारे पास जीवन का सही नक्शा है और बाकी लोगों को उसी रास्ते पर चलना चाहिए  । लेकिन ब्रह्मांड हमारे बने हुए नियमों से नहीं चलता प्रकृति ने किसी एक व्यक्ति को सत्य का ठेकेदार नहीं बनाया जो चीज तुम्हें टूटी हुई दिखाई देते  है ,  हो सकता है कि वह किसी दूसरी दृष्टिकोण से पूर्ण हो  ।

एक पहाड़ को पूर्व दिशा में देखने वाला और पश्चिम दिशा से देखने वाला दोनों अलग दृश्य देखते हैं लेकिन पहाड़ वही रहता है समस्या पहाड़ में नहीं देखने की कोण में होती है

जीवन की सबसे बड़ी बुद्धिमत्ता यह समझना है की परिवर्तन केवल वही संभव है जहां नियंत्रण हो । तुम अपने विचार बदल सकते हो , अपनी आदत भी बदल सकते हो , अपने निर्णय बदल सकते हो ,  लेकिन किसी दूसरे के मन को नहीं बदल सकते ।  तुम सलाह दे सकते हो ,  प्रेरित कर सकते हो  , उदाहरण बन सकते हो ,  लेकिन किसी की चेतना पर अधिकार नहीं कर सकते । जैसे तुम नहीं चाहते कि कोई तुम्हारे मन पर शासन करें वैसे ही दूसरे भी नहीं चाहते इसलिए जो व्यक्ति हर समय दूसरों को बदलने में लगा रहता है वह अंत में निराशा और क्रोध का शिकार हो जाता है क्योंकि वह उसे युद्ध को लड़ रहा होता है जिसे वह कभी जीत नहीं सकता ।

आज जब हम समाज और देश की ओर देखते हैं तो भी यही संघर्ष दिखाई देता है राजनीति में अस्थिर है सामाजिक समस्या है  , अपराध हैं और अनेक ऐसी घटनाएं हैं जो हमें परेशान करती है। हम सोचते हैं कि सब कुछ बदल जाना चाहिए हम चाहते हैं कि लोग बेहतर बने , नेता बेहतर बने  , व्यवस्थाएं बेहतर बने ,  यह इच्छा गलत नहीं है । समस्या तब होती है जब हम उन चीजों को नियंत्रित करने की कोशिश करते हैं जो हमारे हाथ में नहीं है । हम समाचार देखकर क्रोधित हो जाते हैं सोशल मीडिया पर बहस करते हैं , दूसरों को दोष देते हैं  । लेकिन अपने जीवन में कोई परिवर्तन नहीं करते हम पूरी दुनिया को बदलने निकल पड़ते हैं , जबकि अपने मन को संभालना भी कठिन होता है

महान परिवर्तन हमेशा भीतर से शुरू होते हैं। यदि समाज में ईमानदारी चाहिए तो पहले से ईमानदार बनो यदि देश में अनुशासन चाहिए तो पहले अपने जीवन में अनुशासन लाओ । यदि दुनिया में प्रेम चाहिए तो पहले अपने व्यवहार में प्रेम लाओ । एक दीपक पूरे अंधकार को समाप्त नहीं कर सकता लेकिन जहां वह जलता है वह अंधेरा नहीं रहता इसी प्रकार एक जागरुक व्यक्ति पूरी दुनिया नहीं बदल सकता लेकिन वह अपने प्रभाव क्षेत्र को अवश्य बदल सकता है और इतिहास गवाह है कि बड़े परिवर्तन हमेशा कुछ व्यक्तियों के आत्म परिवर्तन से ही शुरू हुए हैं ।

इसलिए जब भी तुम्हें लगे कि दुनिया गलत दिशा में जा रही है तो सबसे पहले स्वयं से पूछो “क्या यह मेरे नियंत्रण में है  ? यदि उत्तर नहीं है तो चिंता छोड़ दो

यदि उत्तर हां है तो कार्य शुरू करो ।

क्योंकि ऊर्जा वही लगानी चाहिए जहां परिणाम संभव हो  । नदी समुद्र को नियंत्रित करने की कोशिश नहीं करती वह केवल बहती रहती है  । सूर्य पूरी पृथ्वी को आदेश नहीं देता वह केवल प्रकाश देता है इसी तरह तुम्हारा कार्य दूसरे को नियंत्रित करना नहीं बल्कि स्वयं को इतना श्रेष्ठ बनाना है कि तुम्हारा जीवन एक  प्रेरणा बन जाए ।

याद रखो जिस पर तुम्हारा नियंत्रण नहीं उसे बदलने की कोशिश दुख देती है लेकिन जिस पर तुम्हारा नियंत्रण है उसे बदलने की शक्ति तुम्हारी पूरी जिंदगी बदल सकती है

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