दोहा :
जमले माँहि जावणो, जागे रावळमाल ।
रूपां गुरु से अरज करे, गुरु म्हारे सामी भाळ ।
थाई वायक आया गुरु देव रा ए रूपों बाई जमले पधारो रे ।। हाँ ।।
केम करे ने गुरु आवो रे ओ नगरो रावळमाल जागे रे।
निदरा मंगावो सारा शहर री रे ढोलिये सांपड़ला पोढावो रे ।।
इतरो करे ने रूप हालिया रे आया रिखियो रे दरबारों रे।
सब रे संतों ने रोमा रोम जी रे म्हारे गुरु ने घणी खम्मा रे ।
हाथ जोड़े ने रूपां बोलिया रे, म्हारी मोजड़ियां हेरोणी रे।
बतियों बुझोणी सारा शहर री रे, नुगरो रावळमाल जाग्यो रे ।।
सांकड़ी सेरी में सामी आवियो रे रोणी कवेळा सिन ग्या था रे।
हाथ जोड़े ने रूपां बोलियारे आपरे, फूल वीणवा ग्या थारे ॥
रावळमाल दे जी बोलिया रे रोणी फूल कठा सूं लाया रे।
पेली वाड़ी रे डर रे डूंगरे रे, दूजी वैकुण्ठों रे माँहि रे ।
तीजी वाड़ी रे सारा शहर में रे चौथी सरगां रे माँहि रे।
रावळमाल दे जी बोलिया रे रोणी थारो पंथड़लो बतावो रे ।।
पहलो मारो रे मोभी दीकरो रे पछे हंसा वाळो घोड़ो रे ।
तीजो मारो रे गऊ रो बाछड़ो रे चौथी चन्द्रावल रोणी रे ।।
इतरो करे ने ओ से आवजे, पछे पंथड़लो बता रे ।
हाथ जोड़े ने रूपां बोलिया रे म्हारे साधुड़ा रो अमरापुर में वासो है।
