मन मस्त फ़कीरी धारी है
अब एक ही धुन जय जय भारत
जय जय भारत जय जय भारत
जय जय भारत जय जय भारत
हम धन्य है इस जगजननी की
सेवा का अवसर है पाया
इसकी माटी वायु जल से
दुर्लभ जीवन है विकसाया
यह पुष्प इसी के चरणोमे
माँ प्राणो से भी प्यारी है
सुन्दर सपने नव आकर्षण
सब तोड चले मुख मोड चले
वैभव महलों का क्या करना
सोते सुख से आकाश तले
साधन की ओर ना ताकेंगे
काँटों की राह हमारी है
इस समय चुनौती भीषण है
अरि देश द्रोह सीना ताने
पथ भ्रष्ट नीतियां चलती है
आतंकी घूमे मनमाने
जन जन में स्वत्व जगायेंगे
भारत की शक्ति अपारी है
ऋषियों मुनियों संतो का तप
अनमोल हमारी थाती है
बलिदानी वीरों की गाथा
अपने रग रग लहराती है
गौरवमय नव इतिहास रचे
अब अपनी ही तो बारी है
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