माटी खोदने तो महल बनाया, मूर्ख कहे घर मेरा,
नहीं घर तेरा नहीं घर मेरा, चले जंगल में डेरा ओ ||
माता केवे बेटा मेरा, बहिन केवे भाई मेरा ओ,
भाया केवा सुणा, जो नारी केवे वर मेरा ओ||
माता रोवे जन्म जन्म, बहिन रोवे दीवारा
घर की तिरिया तेरा दिन रोवे, फेर करे घरवासा ओ ||
कौड़ी कौड़ी माया जोड़ी, जोड़ ने भरिया भेल ओ,
भेला तो अथाणी में तँला, जीव जावे अकेला रे ||
चाँदी पेरो सोना पेरो, पेरो तो हिरला हाथ में,
बाल गोल ने हीरा चढ़ावा, तो नई मरण रो आशा है।
माटी खोदेना, माटी बिछाना, माटी संगी रेण जी
कहत कबीर सुणो भाई साधो, माटी से मिल जाना
