बिना निवण कुण तिरिया….. देसी मारवाड़ी भजन lyrics
बिना निवण कुण तिरिया….. दोहा : निवण बड़ी संसार में, और नहीं निवे सो नीच । निवे नदी रो गूंदलो, वो रेवे नदी रे बीच ।। * निवे ज्यूं आम्बा…
बिना निवण कुण तिरिया….. दोहा : निवण बड़ी संसार में, और नहीं निवे सो नीच । निवे नदी रो गूंदलो, वो रेवे नदी रे बीच ।। * निवे ज्यूं आम्बा…
हम सबका जन्म हरि नाम जपने के लिए हुआ है, परंतु अक्सर यह महसूस होता है कि जीवन का कोई और भी उद्देश्य है। इस संदर्भ में महाराज जी समझाते…
जब मन बार-बार छोड़ी हुई पुरानी आदतों की ओर ले जाता है और सांसारिक प्रतिकूलता आने पर मन अशांत होता है, तो ऐसे में उनसे लड़ना और सहन करना ही…
अवतार सिंह जी पटियाला से, महाराज जी आपके चरणों में कोटि-कोटि प्रणाम। महाराज जी, आपके सत्संग सुनकर भगवान जी और मां जगदंबा जी की कृपा से यह ज्ञान हुआ कि…
राम राम राम राम राम राम नाम में जीवन बीते मेंरे भैया जीवन की ये राहें सारी ,आती जाती छाया सच्चा साथी एक ही तेरा राम नाम की माया धनी…
जय सरस्वती माता, मैया जय सरस्वती माता । सद्गुण वैभव शालिनी , त्रिभुवन विख्यात ।। जय जय सरस्वती माता ।। चंद्रावदनी पद्मासिनि , कृति मंगलकारी । सोए शुभ हंस सवारी…
मोहे मोर बनइयो तो बनइयो वृन्दावन को मैं नाच नाच कूद कूद, तुमई को रिझाउंगो !! मोहे बंदर बनइयो तो, बनइयो सेवाकुंज को ! मैं कूदफांद ब्रजनन जोरन दिखाऊंगी !!…
वृंदावन का मोर बनू , गाऊ में तो राधे राधे। मोर बनियाओ तो बनइयो वृंदावन का , नाच नाच श्याम को रिझाऊं, गाऊ में तो राधे राधे। कोयल बनइयो तो…
ओ मेरे भोले जी, मेरे शंभु जी , मेरे बाबा जी , मेरे भोले जी , मेरे भोले जी करदो नजर, हंसके कट जाए सारी उमर, हां , मेरे भोले…
आया आया जी सतगुरु मारे पावना मारवाड़ी भजन lyrics आया आया जी सतगुरु मारे पावना सतगुरु आया जी सैया म्हारे पावना सतगुरु आया जी सैया म्हारे पावना अरे आयाड्रो म्हारे…
विघ्न हरण मंगल करण , और गणनायक गणराज । रिद्धि-सिद्धि सहित पधारजो देवा पूर्ण करजो काज ।। मैं थाने शिवरो गजानंद देवा , वचनों रा पालन हारा जि यो ,…
“ॐ श्री जम्बूद्वीपे भारतखण्ड” श्री जम्बूद्वीपे भारतखण्ड जम्बूद्वीपे भारतखण्डे आर्यावर्ते भरतवर्षे।राज्ये नगराग्रामे वा मम संकल्पः अयं अस्ति॥ उत्तरं यत्समुद्रस्य हिमाद्रेश्चैव दक्षिणे।भरतं नाम वर्षं यत्र भतन्ति ता भरताः स्त्रियः॥ जम्बूद्वीपे शतयोजनप्रदीपे…
दोहा: श्रीगुरु चरन सरोज रज, निज मनु मुकुरु सुधारि। बरनउँ रघुबर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि ॥ गुरु के चरणों की धूल से अपने मन के दर्पण को शुद्ध…
अष्टावक्र गीता का छठा अध्याय अद्वैत वेदांत की अत्यंत सूक्ष्म और ऊंची अवस्था को प्रकट करता है यह अध्याय साधक को यह समझना नहीं आता कि क्या करना है ,…
हमारे साथ श्री रघुनाथ तो किस बात की चिंता शरण में रख दिया जब माथ तो किस बात की चिंता । क्या करते हो तुम दिन रात कयूं बिन बात…
हे राम हे राम हे हे राम हे राम जग में सांचौ तेरो नाम हे राम तू ही माता तू ही पिता है तू ही माता तू ही पिता है…
रामा रामा रटते रटते , बीती रे उमरिया – रघुकुल नंदन कब आओगे भीलनी की डगरिया ।। मैं शबरी भीलनी की जाई , भजन भाव ना जानू रे । राम…