हमारे प्यारे गुरुजी जी कहते है आज की ☺️😚🥰
सबसे पहला प्रश्न हम करेंगे। आपको उत्तर देना है। ?
भजन के लिए सुविधा है ? या सुविधा के लिए भजन है?
उत्तर दीजिए। जी।
भजन के लिए सुविधा है। 😂😀☺️🤨🧐
सुविधा पक्का दिमाग में है। 🧐🤨😂😀🥰😚☺️
नहीं देख लो। वृंदावन में बैठे हो तेज हो गए महाराज अब देख लो मतलब अब इसीलिए पहले प्रश्न किया है कि भजन के लिए सुविधा है या सुविधा के लिए भजन है?
भजन के लिए सुविधा जिनकी है वो हाथ खड़ा करें। 🙏🖐️🤚
और सुविधा के लिए भजन है वह हाथ खड़ा करें ज्यादा दूसरे ठीक है।
भजन के लिए ही हमारी जितनी भी जीवनी शक्ति है जितनी भी बाह्य व्यवस्था है जितना भी पारिवारिक संबंध है बहुत ध्यान से सुनना आप अध्यात्म की चर्चा सुनने आए है
यहां व्यर्थ का वार्ता तो है नहीं।
आपका मनुष्य जन्म लेना, आपका गृहस्थ या विरक्त होना, आपके पास जो भी सुख सुविधाएं हैं, वह सब केवल भगवत प्राप्ति के लिए है। अब आगे क्या होना है? अब आगे यह हो जाए, अब आगे वो हो जाए। और हमारे दिमाग में यह बात नहीं आ रही कि आगे मृत्यु आ रही है
जो सर्वस्व अपहरण कर लेगी। अगर हम भगवान की प्राप्ति नहीं कर पाए
सो परत्र दुख पावई सिर धुन धुन पछताए काले कर्म ईश्वर मिथ्या दोष लगाए।
अरे भाई भगवान अनुकूल नहीं थे इसलिए काल अनुकूल नहीं था। ये इसलिए सबसे प्रार्थना हम करना चाहते हैं हृदय से।
आप लोग हमारी बात को समझिए । भगवान ने सुविधा दी है भजन के लिए।
भजन जन अविनाशी है। अविनाशी भजन के बदले में सुविधा मत मांगो यार। धोखे में हो जाओगे। सोने का सिक्का देकर के व्यर्थ की वस्तुएं, खिलवाड़ की वस्तुएं खरीदना ऐसा समझो या विनाशी राम नाम, कृष्ण नाम, हरि नाम, राधा नाम और इसके बदले में सुविधा भोग आखिरकार वो तो प्रारब्ध के अधीन आ ही जाएंगे।
स्वामी हरिदास जी महाराज कह रहे हैं ” हरि भज हरि भज छान मान नर तन को मति बछे
रे मति बछे तिल तिल धन को अन मांगे आगे आवेगो जो पल लागे पल को कहे हरिदास मीच ज आवे तों है धन आपन को “
जैसे पलक बिना किसी प्रयास के झपकती रहती है ऐसे सुख और दुख धन संपत्ति ये प्रारब्ध के अनुसार आ जाएगी। आप भजन में लगो।
अपने कर्तव्य का पालन, अपनी सुविधाओं को भजन के लिए रखो तो आपका जीवन सिद्ध हो जाएगा। आप गृहस्थ में हो तो परिपक्व हो जाओगे। विरक्त में हो तो परिपक्व हो जाओगे। कैसे हमारी सुख सुविधा बढ़ जाए? फिर हम भजन करेंगे। माया अवसर नहीं देती। अभी भजन कर लो। यह सब होता रहेगा। भजन के लिए जीवन है। यह हम आपके दिमाग में बैठालना चाहते हैं। बैठा लो। भजन के लिए जीवन है। भजन के लिए नहीं तो व्यर्थ जीवन है। कुछ भी बन जाओ। बड़े-बड़े चक्रवर्ती सम्राट खाक में मिल गए। कुछ नहीं।
ये एक बार राजस्व यज्ञ में महाराज अर्जुन भगवान श्री कृष्ण के पास बैठे हुए थे तो देखा एक चीटा एक चावल के दाने को बड़ी मेहनत से एक टांग टूटी हुई थी तीन टांग के बल जोर लगा के एक चावल के दाने को ले जा रहा था। अर्जुन काफी देर से उस पर नजर गड़ाए हुए थे। बोले प्रभु कितना कितना वैभव देते हो लोगों को इस बेचारे चींटे को
देखो एक दाना चावल का लेकर कितने श्रम से अपने लक्ष्य की तरफ जा रहा है
इसकी एक टांग टूटी हुई है क्या इस पर भी कभी कृपा होगी कभी इसे ऐश्वर्यवान सुखवान बनाओगे तो भगवान ने कहा तुम इसे जानते हो बोले नहीं भगवान ने कहा हम इसे जानते हैं ।
14 बार इंद्र बन चुका है वह चीता पिता 14 बार इंद्र बन चुका है। जैसे इंद्र की पदवी से डायरेक्ट अजगर की योनि में महाराज नौ ऐसा थोड़ी कि तुम इंद्र बन गए। देवराज इंद्र बन गए तो देवता बने रहोगे। देवराज इंद्र की पदवी से डायरेक्ट आए तो अजगर की योनि को प्राप्त हुए। ए भाई मनुष्य योनि मनुष्य योनि में सारी सुविधाएं अपने धर्म का पालन करते हुए भगवत प्राप्ति के लिए है।
यह बात समझ लो। भगवत प्राप्ति ना कर पाओ तो कम से कम भजन इतना कर लो कि अगला जन्म हमें फिर मनुष्य का मिले और हम फिर भगवान की आराधना करके भगवान को प्राप्त हो। अगर भगवान की प्राप्ति नहीं तो मुझे सब धोखा लग रहा है यार। सब नाटक माया का सब धोखा लग रहा है। हमारी बात सुनो। मरने के बाद की बात बताओ क्या है तुम्हारे पास ? और वो आने वाली है मृत्यु नगन में गाना
अगर भगवान की प्राप्ति नहीं तो मुझे सब धोखा लग रहा है यार। सब नाटक माया का सब धोखा लग रहा है। हमारी बात सुनो। मरने के बाद की बात बताओ क्या है तुम्हारे पास ? और वो आने वाली है मृत्यु कब आने वाली है थोड़ी पता नहीं यार।
एक मिनट में आ सकती है। 10 वर्ष बाद आ सकती है। ये इस शरीर के 55 56 वर्ष व्यतीत हो गए। ऐसे व्यतीत हो गए। पता ही नहीं लगे। अब 56 साल का शरीर पता नहीं कितने मिनट है। और सब छूट जाएगा। सब ये शरीर भी छूट जाएगा। सारा वैभव छूट जाएगा। जाएगा क्या? क्या कमाया? तत्व बोध । भगवत प्रेम भजन। खास बात समझो। सत्संग का मतलब होता है जागृति । साधु संग का मतलब होता है अध्यात्म में स्थिति । मनोरंजन नहीं। तो आप उस दिन की सोचो जिस दिन हंस अकेला उड़ने के लिए तैयार होगा।
उस समय कौन है तुम्हारे पास ? क्या है तुम्हारे पास ? इसलिए भाई सुविधा भजन के लिए है। सुविधा भजन के लिए है। भजन सुविधाओं के लिए नहीं तो बहुत बड़ा धोखा हो जाएगा। भजन करके सुविधा चाहोगे तो बहुत घाटे में हो जाओगे। अगर सुविधाओं का प्रयोग भजन में करोगे तो परम लाभ प्राप्त हो जाएगा। यही लोग थोड़ी है। ये तो बहुत गंदा लोक है यार। इसे मर्त लोक कहते हैं।
बड़े सुंदर सुंदर लोक भगवान ने रचना की है और सब लोकों से भगवान ने परमधामों की रचना की। श्रेष्ठ परमधामों में भी बड़े प्रेममय भगवान के मंगलमय धाम है। मंगलमय रूप है। तो हम वहां चलने की सोचे यही क्यों? इसलिए अमृत कुंड की तरफ तमसो मा ज्योतिगम मृत्यु मा अमृतम गम अमृत की यात्रा करो। यहां आप लोग जुड़े हो वृंदावन में आकर के तो भगवत मार्ग के लिए जुड़े अध्यात्म के लिए जुड़े हो लौकिक संपत्ति तो पीछे घूमेगी इसलिए हम सबसे यह बात समझाना चाहते हैं कि मनुष्य जीवन से लेकर हर सुविधा केवल भगवत प्राप्ति के लिए मिली साधन धाम मोक्ष कर द्वारा पाए न जे परलोक संभारा ये परलोक संभालने के लिए मिला है तो हमारी प्रार्थना मान लो जिससे जितना अधिक से अधिक बन सके नाम जप करो कृत धते विष्णु त्रेताया यते मख द्वापरे परिचयाम कलधर कीर्तनात कलयुग में भगवान के नाम की विशिष्ट महिमा वैसे चौग चौति नाम प्रभाव कल विशेष नहीं आ पाऊ कलयुग में तो विशेष भगवन नाम से ही कल्याण होता है तो अधिक से अधिक राधा राधा जपो राम राम जपो कृष्ण कृष्ण जपो और पाप पाप आचरण से बचो तो मनुष्य जीवन का जो परम लाभ है वह भगवान की प्राप्ति हो जाएगी।
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