जब मन बार-बार छोड़ी हुई पुरानी आदतों की ओर ले जाता है और सांसारिक प्रतिकूलता आने पर मन अशांत होता है, तो ऐसे में उनसे लड़ना और सहन करना ही सच्ची साधना है। मन का स्वभाव भोगों की ओर भागने का होता है, जो आपको मानसिक व्यथा और घबराहट दे सकता है, लेकिन आपको दृढ़ संकल्प के साथ यह कहना चाहिए कि आप उन गलत आचरणों को दोबारा नहीं अपनाएंगे, चाहे कितनी भी मानसिक जलन क्यों न हो। एकांत में मन आपको परास्त करने की कोशिश करेगा, इसलिए उस समय भगवान का नाम जपें, सत्संग सुनें या किसी साधक से बातचीत करें। डरने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि मन केवल प्रलोभन या डर दिखाकर आपको फंसा सकता है। यदि आप अपनी स्वीकृति न दें और इन विकारों को सहने की क्षमता विकसित कर लें, तो यही मन शांत होकर सदा के लिए प्रभु की भक्ति में लग जाएगा।
अपना देश, अपनी ज़िम्मेदारी -मिलकर बनाए नया भारत
