
आजकल रो जमाणो घणो बदल गयो है। जिधर देखो उधर फिल्मां अर वेब सीरीजां में अश्लीलता (vulgarity) ने फैशन बना दियो गयो है। इब्बा हालात एसा हो ग्या है कि युवा पीढ़ी, जिको देश रो भविष्य म्हान्यो जावे है, वो भी आ गंदी चीजां सूं प्रभावित हो री है। ऐसे में पूज्य प्रेमानंद जी महाराज सा रो कड़को संदेश समाज खातर एक जागरण जिको काम करै है। महाराज सा साफ शब्दां में कह्यो है कि जे फिल्मां अर मनोरंजन रो नाम लेके जे अश्लीलता फैलावै है, वो समाज ने अंदर सूं खोखलो कर री है। आज रो युवा जिको चरित्र मजबूत होणो चाहिए, वो उल्टा भ्रम अर वासनाओं में फंसतो जावै है।
महाराज सा बार-बार समझावै है कि इंसान रो जीवन केवल भोग-विलास खातर कोनी होतो, पर आत्मा रो विकास अर ऊँचा विचारां खातर होतो है। पर फिल्मां में जिको दिखावै जावै है, वो बिल्कुल उल्टो है—नैतिकता ने छोड़ के केवल शरीर अर वासना ने बढ़ावा दियो जावै है। युवा जिको प्रेरणा संत, शास्त्र अर महान व्यक्तित्व सूं लेणी चाहिए, वो आजकल इन झूठी चमक-दमक में फंस गयो है। प्रेमानंद जी महाराज सा कहै है कि जे मनोरंजन कोनी, पर मन रो विकार है, जिको धीरे-धीरे मनुष्य ने पतन री ओर ले जावै है।
आज जरूरत है कि हम सब जागरूक बनां, अर आपणा घर-परिवार में भी संस्कारां रो वातावरण बनावां। माता-पिता ने भी ध्यान राखणो पड़सी कि बालक काई देख रया है, काई सीख रया है। अगर समय रहते हम आ दिशा ने सही कोनी करां, तो आने वालो समय घणो खतरनाक हो सकै है। प्रेमानंद जी महाराज सा रो संदेश एक चेतावनी है—कि अगर हम आज भी ना संभलां, तो कल पछतावणो ही हाथ आवेगा। सच्चो सुख अर शांति केवल संयम, भक्ति अर शुद्ध जीवन में ही मिलै है, ना कि अश्लीलता अर दिखावे में।
आज हामने केवल आपणे बारे में कोनी सोचणो, पण आने वाली पीढ़ी, आपड़ो समाज अर आपड़ो राष्ट्र खातर भी जिम्मेदारी समझणी जरूरी है। जिको युवा आज अश्लीलता अर गलत दिशा में जावै है, वही कल रो समाज बनावै है। अगर आज रो बालक अर युवा मन सूं कमजोर, वासनाओं में डूबेलो अर बिना संस्कारां रो हो गयो, तो कल देश रो भविष्य कदापि उज्ज्वल कोनी हो सकै। प्रेमानंद जी महाराज सा यही बात समझावै है कि एक-एक व्यक्ति रो चरित्र ही राष्ट्र रो चरित्र बनावै है।
हामने आज सूं ही संकल्प लेणो पड़सी कि हाम आपणी संस्कृति, आपणा संस्कार अर धर्म ने बचावां। फिल्मां अर सोशल मीडिया जिको जहर धीरे-धीरे फैलावै है, ऊस सूं बचणो अर दूसरां ने भी बचावणो हामरो कर्तव्य है। बालकां ने सही शिक्षा, सही दिशा अर उच्च विचार देवणो जरूरी है, ताकि वो केवल पढ़ाई में ही कोनी, पण जीवन में भी महान बन सकै। अगर घर-घर में संस्कार, भक्ति अर संयम आवे, तो पूरा समाज अपने आप सुधर जावै।
राष्ट्र रो निर्माण कोई सरकार अकेली कोनी कर सकै, वो हर एक नागरिक सूं होवै है। अगर हाम आज आपणा कर्तव्य समझ के सही मार्ग पर चालां, तो आने वाली पीढ़ी ने एक सशक्त, संस्कारी अर उज्ज्वल भारत दे सकां। प्रेमानंद जी महाराज सा रो संदेश केवल सुनणो ही कोनी, पण जीवन में उतारणो जरूरी है—क्योंकि आज रो एक छोटो बदलाव, कल रो महान राष्ट्र बना सकै है।
